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Rakshabandhan 2025: राखी बांधने का शुभ समय और भद्रा मुहूर्त—सब कुछ एक साथ जानिए

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Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन पर हर साल भद्रा होने के कारण राखी बांधने का समय और तारीख को लेकर काफी उलझन रहती है। बता दें कि भद्रा तो हर साल रहती है लेकिन, भद्रा कहा स्थित है यह विशेष रुप से मायने रखता है। इस बार भी रक्षाबंधन पर भद्रा तो रहेगी लेकिन, उसका वास कहा स्थित है उसी हिसाब से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। बता दें कि रक्षाबंधन का पर्व इस बार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। जानें पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार भद्रा का वास कब होगा।

क्या इस बार भी है रक्षाबंधन पर भद्रा का साया ?
बता दें कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त शनिवार के दिन मनाया जाएगा। ग्रंथों के अनुसार, भद्रा का वास मूल रूप से तीन स्थानों पर अधिक रहता है। पहले स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक। जहां भद्रा का वास होता है इसके हिसाब से ही वह अपना प्रभाव दिखाती है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। बता दें कि शनिदेव की बहन और सूर्य देव की पुत्री हैं। भद्रा का स्वभाव काफी कठोर था। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए उन्हें पंचांग में एक प्रमुख स्थान दिया गाय। भद्रा को विष्टि करण के रूप में पंचांग में मान्यता दी गई। बता दें कि भद्रा हमेशा ही अशुभ नहीं होती है। हालांकि, कुछ विशेष कार्यों में इसका वास शुभ माना जाता है।

ऐसे समझे भद्रा की गणना
पंचांग की गणना भद्रा तिथि, योग, नक्षत्र, वार और करण के हिसाब से की जाती है। इन सभी में से भी सबसे महत्वपूर्ण करण को माना जाता है। बता दें कि कुल मिलाकर 11 करण होते हैं। जिनमें से कुछ स्थिर और कुछ अस्थिर होते हैं। करण में शकुनि, नाग, किस्तुघ्न और चतुषपद अचर (स्थिर) होते हैं और बाकी 7 बालव, कोलव, तौतिल, बव, गर, विष्टि और वाणिज्य चर यानी अस्थिर होते हैं। यानी यह करण हमेशा ही गतिशील मतलब चलते रहते हैं।

भद्रा का वास कैसे पता करें
जब भी चंद्रमा का गोचर मेष, वृषभ, मिथुन और वृश्चिक राशि में होता है तो भद्रा का वास स्वर्ग लोक में माना जाता है। वहीं, जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में गोचर करते हैं तो भद्रा का वास पाताल में माना जाता है। लेकिन, जब भी चंद्रमा का गोचर कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में होता है तो भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर माना जाता है। जब भी भद्रा का वास स्वर्ग लोक और पाताल लोक में होता है तो वह अशुभ फल प्रदान नहीं करती है। पौराणिक ग्रंथ चिंतामणि के अनुसार, भद्रा का वास जहां होता है वहां भद्रा प्रभावी होती है।

रक्षाबंधन (9 अगस्त)पर कहां होगा भद्रा का वास
बता दें कि 9 अगस्त को चंद्रमा का गोचर मकर राशि में रहेगा। ऐसे में भद्रा का वास पाताल लोक में होगा और भद्रा का मुख अधोमुखी होगा यानी नीचे की तरफ होगा। ऐसे में 9 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व भद्रा रहित होने से कारण सुबह से ही मनाना शुभ रहेगा।

 

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