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Shardiya Navratri 2025 :महाअष्टमी पर कल ऐसे करें हवन और कन्या पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

Shardiya Navratri 2025 :महाअष्टमी पर कल ऐसे करें हवन और कन्या पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त
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शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं। भक्तों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। नवरात्रि के दौरान अष्टमी का दिन शक्ति साधना और देवी भक्ति का चरम होता है, इसलिए इसे विशेष रूप से शुभ माना गया है।

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महाअष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस वर्ष महाअष्टमी तिथि 30 सितंबर 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर की रात 11 बजकर 46 मिनट पर होगी और इसका समापन 30 सितंबर की रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा। कन्या पूजन के लिए सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान की गई पूजा और अनुष्ठान को विशेष फलदायी बताया गया है।

महाअष्टमी की पूजा विधि

महाअष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य से माता की पूजा करें। इस दिन दुर्गा सप्तशती, देवी कवच या मां के अन्य स्तोत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हवन करने की परंपरा

महाअष्टमी के दिन हवन करने की विशेष परंपरा होती है। पूजा के बाद हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर उसमें घी, जौ, तिल और हवन सामग्री अर्पित की जाती है। देवी के मंत्रों का उच्चारण करते हुए आहुति देने से वातावरण पवित्र होता है और मन को दिव्य शांति मिलती है। हवन को नवरात्रि की साधना का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

कन्या पूजन का धार्मिक महत्व

अष्टमी के दिन कन्या पूजन को अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि दो से दस वर्ष की आयु की कन्याओं में मां दुर्गा के नौ रूपों का वास होता है। इस दिन घर पर कन्याओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोए जाते हैं, रोली, अक्षत और फूल अर्पित कर उन्हें पूजन के रूप में देवी का सम्मान दिया जाता है। पारंपरिक रूप से उन्हें पूरी, हलवा और चने का प्रसाद परोसा जाता है और अंत में चुनरी, उपहार और दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है। ऐसा करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें

महाअष्टमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन करते समय शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ समय में किए गए अनुष्ठान अधिक फलदायी होते हैं। साथ ही पूजा करते समय मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए। श्रद्धा और भक्ति भाव से की गई पूजा मां दुर्गा को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

Shivani Verma
Author: Shivani Verma

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