शारदीय नवरात्र के नौ दिन हिन्दू धर्म में मां दुर्गा की नौ स्वरूपों की आराधना का समय होते हैं। इन नौ दिनों में विशेष रूप से अष्टमी और नवमी का महत्व बहुत अधिक है। नवरात्र की दुर्गाष्टमी पर संधि पूजा का आयोजन विशेष रूप से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह पूजा अष्टमी और नवमी के बीच के संधि काल में की जाती है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
संधि पूजा का महत्व
संधि पूजा को अष्टमी और नवमी के बीच के समय में अंजाम दिया जाता है। इसे मां दुर्गा के त्रिनेत्र रूप की पूजा माना जाता है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, संधि काल में की गई पूजा और अनुष्ठान का प्रभाव अन्य समय की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। इस समय मां दुर्गा की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएँ जल्दी पूरी होती हैं।संधि पूजा विशेष रूप से सिंहवाहिनी देवी यानी मां दुर्गा के तीन स्वरूपोंमहागौरी, महाकाली और मां दुर्गा के मध्य स्वरूप—की पूजा के लिए की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने जीवन में बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति पाना चाहते हैं।
दुर्गाष्टमी का धार्मिक महत्व
दुर्गाष्टमी नवरात्र का आठवां दिन होता है। इस दिन विशेष रूप से मां दुर्गा के बल, साहस और शक्ति स्वरूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और संधि पूजा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और वैभव आता है।धार्मिक मान्यता है कि दुर्गाष्टमी के दिन देवी की विशेष आराधना करने से शत्रु नष्ट होते हैं और जीवन की हर कठिनाई दूर होती है। साथ ही, यह समय देवी माँ की कृपा प्राप्त करने और अपने कर्मों में सफलता पाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
इस वर्ष दुर्गाष्टमी पर संधि पूजा का शुभ मुहूर्त निम्नानुसार है,आरंभ समय: सुबह 6:30 बजे से संधि काल,सुबह 7:45 बजे से 8:15 बजे तक पूजा का समय: संधि काल में ही करना शुभ माना जाता है
पूजा विधि में देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक, अगरबत्ती और लाल पुष्पों का प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से कन्याओं का पूजन और उन्हें भेंट देना इस दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। भक्त इस दिन माता के नौ स्वरूपों की स्तुति, मंत्र जाप और हवन करते है नवरात्र की दुर्गाष्टमी पर संधि पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिक उन्नति और समाज में सेवा भाव का प्रतीक भी है। इस शुभ अवसर का लाभ उठाकर मां दुर्गा की आराधना और सेवा भाव में भाग लेने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शक्ति आती है।इस वर्ष बने विशेष शुभ मुहूर्त में संधि पूजा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।













