उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में शारदीय नवरात्र के नौ पावन दिन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जा रहे हैं। इन नौ दिनों में नवरात्र की महानवमी का विशेष महत्व है। यह दिन न केवल नवरात्र का आठवां या नौवां दिन है बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। महानवमी के दिन की पूजा से देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, और जीवन में शक्ति, सफलता, सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दिन की पूजा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन देवी दुर्गा के राक्षस महिषासुर पर विजय प्राप्त करने के पर्व के साथ जुड़ा हुआ है।
महानवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
महानवमी को देवी दुर्गा का वह दिन माना जाता है जब उन्होंने अपने परम तेज और शक्ति का परिचय देते हुए महिषासुर जैसे दुष्ट राक्षस का वध किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की पूजा से न केवल बुरी शक्तियों का नाश होता है बल्कि जीवन में नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति भी मिलती है। नवरात्र के दौरान नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें शक्ति, साहस, बुद्धि, करुणा और समृद्धि के स्वरूप शामिल हैं। महानवमी पर इन नौ स्वरूपों की विशेष पूजा और मंत्र जाप से भक्तों को विशेष लाभ और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि जो व्यक्ति इस दिन माता दुर्गा की पूजा और व्रत विधिपूर्वक करता है, उसके जीवन में सभी बाधाएं दूर होती हैं और उसके घर और व्यवसाय में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए महानवमी केवल धार्मिक उत्सव का दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी है।
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महानवमी पर पूजा की विधि
महानवमी के दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले घर या मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना की जाती है। पूजा स्थल को साफ़-सुथरा करके लाल कपड़े और फूलों से सजाया जाता है। दीपक, धूप, नैवेद्य और प्रसाद का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए उनकी स्तुति करते हैं।पूजा के दौरान कथा वाचन और भजन-कीर्तन का आयोजन करने से पूजा का आध्यात्मिक लाभ और बढ़ जाता है। इसके अलावा कन्याओं का पूजन और उन्हें भोजन या भेंट देना इस दिन विशेष शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति कन्या पूजन और प्रसाद वितरण करता है, उसे माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उसका घर सुख-समृद्धि से भर जाता है।इस दिन व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फल, दूध, सत्तू या हल्का भोजन करके माता की आराधना में संलग्न रहते हैं। पूजा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण से सभी श्रद्धालुओं का मनोबल और भक्ति भाव बढ़ता है।
महानवमी का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष महानवमी का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से प्रारंभ होकर सुबह 9:00 बजे तक रहेगा। इसी बीच आने वाला संधि काल सुबह 8:00 बजे से 8:30 बजे तक सबसे अधिक शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार संधि काल में मां दुर्गा की पूजा करने से उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएँ जल्दी पूर्ण होती हैं। इस समय पूजा करने से घर, व्यवसाय और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
पूजन और व्रत के लाभ
महानवमी पर की गई पूजा और व्रत से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह दिन मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करता है। देवी दुर्गा की आराधना से नकारात्मक प्रभाव और बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। इसके साथ ही व्यवसाय, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं। भक्तगण इस अवसर का उपयोग अपने घर और मंदिर में मां दुर्गा की सेवा, कथा वाचन और प्रसाद वितरण में भाग लेकर अपने जीवन में आध्यात्मिक और सामाजिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि महानवमी के दिन किए गए अनुष्ठान का प्रभाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी दिखाई देता है। यह दिन परिवार और समाज में एकता, सहयोग और सेवा भाव बढ़ाने का भी अवसर प्रदान करता है।













