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Dussehra 2025 : कल दशहरा पर न लगेगी भद्रा न लगेगा पंचक, जानें किस मुहूर्त में होगा रावण दहन

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उत्तर भारत में दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। रावण दहन के माध्यम से भगवान राम की आदर्श जीवनशैली, सत्य और धर्म के मार्ग का संदेश मिलता है। लोगों में इस पर्व के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा मिलता है, बल्कि समाज में सदाचार, भाईचारा और सामूहिक सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह त्योहार समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को भी जीवित रखता है। बच्चों और युवाओं के लिए यह पर्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रामलीला और रावण दहन के माध्यम से उन्हें धर्म, न्याय और अच्छाई के महत्व की शिक्षा मिलती है।

इस वर्ष भद्रा और पंचक का नहीं रहेगा प्रभाव

हिंदू पंचांग में भद्रा और पंचक विशेष रूप से अशुभ समय के लिए जाने जाते हैं। भद्रा विवाद, असमय घटनाओं और बाधाओं का संकेत देती है, जबकि पंचक किसी भी नए कार्य या धार्मिक अनुष्ठान के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इन दिनों किसी भी शुभ कार्य को करने से परिणाम अक्सर अधूरे या असफल माने जाते हैं।लेकिन इस वर्ष दशहरा के दिन [दिनांक डालें], भद्रा और पंचक का प्रभाव नहीं रहेगा। इसका मतलब है कि श्रद्धालु और परिवार बिना किसी अशुभ प्रभाव की चिंता किए, रावण दहन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन कर सकते हैं। यह एक दुर्लभ और शुभ अवसर है, जब धार्मिक अनुष्ठान पूरी विधिवतता और भक्ति के साथ संपन्न हो सकते हैं।

Dussehra 2025: When is Dussehra, October 1 or 2? Learn the auspicious time and significance of Ravana Dahan. | News Puran

रावण दहन का शुभ मुहूर्त और तैयारी

विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष रावण दहन का सबसे शुभ समय संध्या के समय, लगभग [समय डालें] है। इस समय पर रावण के पुतले का दहन करना अत्यंत मंगलमय माना जाता है। मंदिर और मैदानों में रावण के पुतलों की स्थापना सुबह से ही शुरू हो जाती है, और शाम के समय विधिवत पूजा और आरती के बाद उन्हें आग के हवाले किया जाता है।इस अवसर पर लोगों द्वारा माँ दुर्गा की पूजा, हवन और मंत्रोच्चारण भी किया जाता है। घर-घर और समुदायिक स्तर पर लोग इस पर्व के लिए विशेष सजावट करते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन और रामलीला का आयोजन किया जाता है।

दशहरा और रामलीला का सामाजिक संदेश

रामलीला और रावण दहन का आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं है। यह समाज में नैतिक और सामाजिक शिक्षा देने का माध्यम भी है। बच्चों और युवाओं के लिए यह पर्व जीवन में अच्छाई, ईमानदारी और धैर्य के महत्व को समझने का अवसर है।स्थानीय प्रशासन और समाजिक संगठन इस अवसर पर विशेष रूप से सज-धज कर कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। माता की पूजा, हवन और आरती के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों को जोड़ने और सामूहिक भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलता है।

इस वर्ष दशहरा विशेष रूप से शुभ और मंगलमय है क्योंकि भद्रा और पंचक का प्रभाव नहीं है। इससे श्रद्धालु बिना किसी चिंता के रावण दहन, कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। यह पर्व न केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, भक्ति और सद्भाव का संदेश भी फैलाता है।शुभ मुहूर्त में रावण दहन के माध्यम से हर व्यक्ति अपने घर और समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धर्म की भावना का संचार कर सकता है। इस अवसर पर परिवार और समाज एक साथ मिलकर त्योहार को हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

Shivani Verma
Author: Shivani Verma

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