Sankashti Chaturthi 2025: आज देशभर में गणाधिप Sankashti Chaturthi का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि, ज्ञान तथा सौभाग्य के देवता कहा जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, लेकिन जब यह चतुर्थी गुरुवार या मंगलवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन जो भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं, उनके जीवन के सभी संकट और दुख दूर हो जाते हैं। इस व्रत का पालन करने से मन की शांति, परिवार में सुख-समृद्धि और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी तिथि आज यानी 8 नवंबर 2025, शनिवार सुबह 8 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है और यह तिथि 9 नवंबर को सुबह 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगीभक्त इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत की प्रतिज्ञा लेते हैं और पूरे दिन भगवान गणेश की आराधना करते हैं।इस व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद किया जाता है। आज रात चंद्रोदय का समय 8 बजकर 57 मिनट पर है। इसी समय के बाद भक्त भगवान गणेश की पूजा कर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करके व्रत का समापन करेंगे।
पूजा विधि और नियम
इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर गणपति बप्पा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।भगवान गणेश को लाल फूल, दुर्वा घास, मोदक, लड्डू, फल और सिंदूर अर्पित करें।गणेश चालीसा या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और गणपति बप्पा से अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें।व्रत का पारण जल या फलों से किया जा सकता है, और उसके बाद परिवार के साथ भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण करें।
व्रत का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान गणेश को यह व्रत करने का निर्देश दिया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि जो भक्त संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखता है, उसके जीवन के सभी विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं।‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ होता है – संकटों को हरने वाली, और ‘चतुर्थी’ का अर्थ होता है – चंद्रमा की चौथी तिथि। इस दिन किया गया व्रत व्यक्ति को सभी प्रकार की परेशानियों, रोगों और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाता है।
आध्यात्मिक संदेश
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का यह दिन हमें यह संदेश देता है कि यदि हम दृढ़ संकल्प और निष्ठा के साथ भगवान गणेश की शरण में जाएं, तो जीवन के हर संकट से उबर सकते हैं। यह व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मन की स्थिरता का भी प्रतीक है।आज के दिन “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!” के जयकारों से मंदिरों और घरों में भक्तिमय माहौल बना हुआ है.
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