Kaal Bhairav Jayanti : आज काल Kaal Bhairav Jayanti का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप “काल भैरव” की उपासना के लिए समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए काल भैरव का रूप धारण किया था। इसी कारण यह तिथि भय, नकारात्मक शक्तियों, रोग और अकाल मृत्यु से मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है। भक्त इस दिन श्रद्धा और भक्ति से भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं ताकि जीवन में साहस, स्थिरता और सुरक्षा बनी रहे।
काल भैरव जयंती की तिथि और पूजन मुहूर्त
इस वर्ष काल भैरव जयंती 12 नवंबर 2025, बुधवार को मनाई जा रही है। तिथि 12 नवंबर की सुबह 10:45 बजे प्रारंभ होकर 13 नवंबर की सुबह 9:28 बजे तक रहेगी। संध्या पूजन का शुभ मुहूर्त सायं 6:00 बजे से रात 8:15 बजे तक का बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस मुहूर्त में भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से भय और संकट समाप्त होते हैं तथा सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
काल भैरव जयंती की पूजा विधि
काल भैरव जयंती की पूजा विधि सरल और प्रभावशाली है। भक्त सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की वंदना करते हैं और फिर सरसों के तेल का दीपक जलाकर “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करते हैं। भगवान भैरव को काले तिल, काले फूल, इत्र और बिना नमक की सूखी रोटी का भोग लगाया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि कुत्ता भगवान भैरव का वाहन है। ऐसा करने से भगवान की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
पूजन का फल और धार्मिक महत्व
मान्यता है कि जो व्यक्ति काल भैरव जयंती के दिन व्रत रखता और श्रद्धापूर्वक भगवान की आराधना करता है, उसे अकाल मृत्यु, भय, रोग और पापों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सफलता, धन, शांति और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। यह पर्व केवल भय से मुक्ति का नहीं बल्कि आत्मशक्ति और भक्ति का प्रतीक भी है।काल भैरव जयंती न केवल भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा का दिन है, बल्कि यह भय, बुराई और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक भी है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान काल भैरव की आराधना करता है, उसे दिव्य सुरक्षा, आत्मशक्ति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
- Shiv Chalisa Lyrics: प्रत्येक सोमवार पढ़ें शिव चालीसा – जय गिरिजा पति दीन दयाला
- Hanuman Chalisa Niyam :हनुमान चालीसा की किताब या लॉकेट हर जगह साथ रखने में क्या सावधानियां रखनी चाहिए ?













