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Utpanna Ekadashi 2025: उत्पन्ना एकादशी पर रहेगा राहुकाल का साया!

Utpanna Ekadashi 2025: उत्पन्ना एकादशी पर रहेगा राहुकाल का साया!
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Utpanna Ekadashi 2025: उत्पन्ना एकादशी का पावन व्रत इस बार विशेष योग में पड़ रहा है, क्योंकि इस दिन राहुकाल का प्रभाव भी रहेगा। भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित यह एकादशी हर वर्ष मार्गशीर्ष मास में आती है और भक्त बड़ी श्रद्धा से व्रत व पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार एकादशी तिथि 26 नवंबर की सुबह 04:18 बजे से आरंभ होकर 27 नवंबर की सुबह 05:02 बजे तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजा 26 नवंबर को ही की जाएगी।

राहुकाल का साया

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, लेन-देन या पूजा को करना वर्जित माना गया है। उत्पन्ना एकादशी के दिन राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 02:50 बजे तक रहेगा। ऐसे में भक्तों को इसी अवधि में पूजा से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि उनकी साधना और व्रत पूर्ण रूप से फलदायी हो सके।

पूजन का शुभ समय

राहुकाल को छोड़कर पूरे दिन भक्तों के पास कई शुभ अवसर उपलब्ध रहेंगे, जिनमें वह भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। सुबह 06:45 बजे के बाद से माहौल पूजा-अर्चना के लिए अनुकूल रहेगा और दोपहर 12 बजे तक भक्त शांतिपूर्वक विधिवत पूजा संपन्न कर सकते हैं। दोपहर में 01:30 बजे से पहले का समय भी श्रेष्ठ माना गया है। वहीं सूर्यास्त के बाद का समय भी सायंकालीन पूजा के लिए अत्यंत शुभ रहेगा, जिसमें दीपदान, मंत्र-जप और तुलसी-दल अर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उत्पन्ना एकादशी उस दिन का प्रतीक है जब एकादशी देवी का आविर्भाव हुआ था। पौराणिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मन की शुद्धि होती है और भक्तों को विष्णु कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है और जीवन के संकट दूर करने का सामर्थ्य रखता है।

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Shivani Verma
Author: Shivani Verma

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