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Magh Mela 2026: संगम की रेती पर सजे ये 5 जायके, जिनके बिना अधूरा है आपका प्रयागराज ट्रिप

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प्रयागराज के माघ मेले की बात ही कुछ निराली है. यहां सिर्फ गंगा-जमुना के मिलन की आस्था ही नहीं दिखती, बल्कि संगम की रेती पर एक अलग ही दुनिया बसती है. कड़कड़ाती ठंड में जब आप संगम में डुबकी लगाकर बाहर निकलते हैं, तो मेले की गलियों से उठती गरमा-गरम जायकों की खुशबू आपको अपनी ओर खींच ही लेती है. यकीन मानिए, माघ मेले का असली आनंद सिर्फ पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि यहां के चटपटे और पारंपरिक खान-पान में भी छिपा है. अगर आप भी इस बार प्रयागराज जा रहे हैं, तो इन 5 खास स्वादों को चखना बिल्कुल न भूलें, वरना आपका ट्रिप अधूरा ही रह जाएगा.

1. खस्ता कचौड़ी और बेमिसाल दम आलू

प्रयागराज की सुबह का आगाज ही कचौड़ी-सब्जी से होता है. देसी घी की सोंधी खुशबू वाली कुरकुरी कचौड़ी और उसके साथ मिलने वाली तीखी-चटपटी आलू की सब्जी का कोई मुकाबला नहीं है. जब पत्तल में गरमा-गरम कचौड़ी परोसी जाती है, तो वह न केवल पेट भरती है बल्कि ठंड में आपके रोम-रोम को जगा देती है.

2. दही-जलेबी

अगर आप मीठे के शौकीन हैं, तो यहां की जलेबी आपका दिल जीत लेगी. कड़ाही से सीधे उतरती चाशनी में डूबी केसरिया जलेबियां और उसके साथ ताजा गाढ़ा दही प्रयागराज की असली पहचान है. इसका स्वाद इतना तगड़ा होता है कि एक बार चखने के बाद आप बाकियों को भूल जाएंगे. मेले में रहने वाले कल्पवासी तो अक्सर सुबह के नाश्ते में गरमा-गरम जलेबी और दही का लुत्फ उठाते हैं, जो कड़ाके की ठंड में शरीर को ऊर्जा देने वाला सबसे बड़ा और भरोसेमंद स्रोत है.

3. फुल्की और तीखी आलू टिक्की

भारत के हर शहर में आपको गोलगप्पे मिल जाएंगे, लेकिन प्रयागराज में इन्हें फुल्की कहा जाता है. यहां की फुल्की का तीखा और हींग वाला पानी इतना लाजवाब होता है कि आप एक बार शुरू करेंगे तो रुक नहीं पाएंगे. इसके अलावा, लोहे के तवे पर सिकती कुरकुरी आलू टिक्की की सोंधी महक आपको भीड़ में भी अपनी तरफ खींच लेगी.

4. गजक, रेवड़ी और तिल के लड्डू

मकर संक्रांति का त्योहार हो और तिल-गुड़ की मिठास न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है? मेले के बाज़ारों में आपको सोंधी महक वाली गजक, कुरकुरी रेवड़ी और सोंठ वाले तिल के लड्डू हर तरफ सजे हुए मिलेंगे. शाम को गंगा किनारे टहलते हुए इन स्नैक्स का आनंद लेना एक अलग ही सुकून देता है.

5. देहाती रसगुल्ला और केसरिया इमरती

मिठाइयों की बात हो तो प्रयागराज का देहाती रसगुल्ला अपनी एक अलग पहचान रखता है. देसी घी और शुद्ध खोए से बने ये रसगुल्ले इतने सॉफ्ट होते हैं कि मुंह में जाते ही मलाई की तरह घुल जाते हैं. वहीं, गरमा-गरम छनती इमरती का कुरकुरापन और उसकी मिठास आपके सफर को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना देगी.

Madhumita Verma
Author: Madhumita Verma

Anchor Presents news updates and conducts interviews with guests.

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