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Premanand Maharaj Tips: सुबह उठकर मोबाइल चलाना क्यों है गलत, जानिए क्या कहते हैं महाराज जी

Premanand Maharaj Tips: सुबह उठकर मोबाइल चलाना क्यों है गलत, जानिए क्या कहते हैं महाराज जी
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Premanand Maharaj Tips: अक्सर लोगों को सुबह जल्दी उठने में दिक्कत होती है क्योंकि उनके दिनचर्या की शुरुआत ही सुबह 8 से होती है। वहीं, कई लोग सुबह जल्दी तो उठ जाते हैं, लेकिन फिर या तो वो मोबाइल में लग जाते हैं या आलस के कारण पलंग में ही लेटे रहते हैं। जो कि बहुत ही गलत माना जाता है।

ऐसे में सफलता हासिल करने के लिए हर व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठने की आदत बनानी चाहिए, ताकि शरीर पूरे दिन स्वास्थ्य रहे। साथ ही, ब्रह्म मुहूर्त में उठना इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि यह भगवान का समय माना जाता है।

इसी दुविधा को लेकर एक भक्त प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा और उसने कहा कि, ‘मैं बदलना चाहता हूं लेकिन मेरे से सुबह उठा नहीं जाता और मोबाइल नहीं छूटता. मैंने छोटे छोटे संकल्प ले रखे हैं वो भी मैं पूरे नहीं कर पाता हूं! क्या करूं?’ इस पर प्रेमानंद महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि, ‘अभी तो तुम बहुत ही छोटे हो, संकल्प पूरे करने के लिए तुम्हारे पास पूरी जिंदगी है। तुमको सही मार्ग नहीं मिला इसलिए विचलित हो रहे हो। अभी तो आप अपने पूरे जीवन को उन्नतिशील बना सकते हो, बदल सकते हो। जो चाहो वो बन सकते हो। आपकी लगन कमजोर है।

प्रेमानंद महाराज ने बताई अपनी दिनचर्या

आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, ‘हम तो क्लिष्ट रोग से युक्त है. जिसमें शरीर भारी हो जाता है न कुछ खाने का मन करता है और 11-12 बजे तक नींद ही नहीं आती है। अगर जरा सी नींद आनी शुरू होती है, तो हमारी दिनचर्या सुबह 2:00 बजे की है, मतलब 1:30 बजे में जगना होता है।अब अगर हम सोते हैं तो फिर जग नहीं पाएंगे तो ऐसे ही पूरी रात निकल जाती है। ‘

हमारी 2 बजे की दिनचर्या आज से नहीं है, बल्कि 20 वर्षों की है। जब सत्संग श्रम नहीं चलता था, तो सुबह स्नान करके 2 बजे वृंदावन की परिक्रमा, सूर्योदय होते-होते मंगला आरती करते थे। फिर गुरुजी की सेवा करते थे, ऐसा क्रम था।

‘ब्रह्म मुहूर्त में उठने का संकल्प

फिर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, ‘आजकल तो सुविधा है, अलार्म लगा लीजिए। वह आपको जगा देगा। आप जग गए, दिनचर्या शुरू करें। कुछ दिन बाद अपने आप ही बिना अलार्म के जगने की आदत बन जाएगी। पहले लोगों की ऐसी दिनचर्या थी कि घड़ी से मिलाकर देखो तो 5 मिनट का भी अंतर नहीं होता था। अपने आप सही समय पर आंख खुल जाती थी, आदत और अभ्यास से.’ ‘तो हम अपनी आदत खराब कर रहे हैं। इसमें हमें किसी के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है। रात में सोते समय भगवत चिंतन करके सोइए और मन में संकल्प कीजिए कि मुझे 4 बजे उठना ही है। अगर संकल्प सच्चा होगा तो आप जरूर जाग जाएंगे, क्योंकि हर व्यक्ति के अंदर भगवान होते हैं। केवल 1 साल में यह आदत बदली जा सकती है, फिर 4 बजे के बाद नींद ही नहीं आएगी।

खराब आदतों का करें त्याग’

गलत अभ्यास करेंगे तो दुख मिलेगा, सही करेंगे तो लाभ। अगर आदत बिगड़ गई तो फिर रोकना कठिन हो जाएगा। बालक को 6 घंटे की नींद जरूरी है। साधक के लिए 4-5 घंटे पर्याप्त हैं। अच्छे साधक के लिए 3 घंटे भी काफी हैं।

समाप्त……..

Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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