Home » ब्लॉग » Mahabharat Curse: महाभारत के श्राप जो बने कलयुग के लिए चेतावनी, जानें उनसे जुड़ी मान्यताएं

Mahabharat Curse: महाभारत के श्राप जो बने कलयुग के लिए चेतावनी, जानें उनसे जुड़ी मान्यताएं

Mahabharat Curse : महाभारत के श्राप जो बने कलयुग के लिए चेतावनी, जानें उनसे जुड़ी मान्यताएं
Facebook
X
WhatsApp

Mahabharat Curse: महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि जीवन का एक बड़ा ग्रंथ माना जाता है। यह कौरवों और पांडवों के बीच हुआ युद्ध था, जो धर्म और अधर्म की लड़ाई का प्रतीक है। इसमें हमें कर्म, सत्य, रिश्तों और निर्णयों के परिणाम के बारे में गहरी सीख मिलती है। इस दौरान कई ऐसे श्राप दिए गए, जिन्हें लेकर मान्यता है कि उनका असर आज के कलयुग में भी देखा जाता है। इन श्रापों को लोग कर्मों के फल और चेतावनी के रूप में देखते हैं।
तो आइए विस्तार से जानते हैं उन श्रापों के बारे में-

युधिष्ठिर ने दिया था समस्त नारी जाति को श्राप

महाभारत की कथानुसार, जब कर्ण की मृत्यु हुई थी, तब उसकी अंतिम क्रिया के समय कुंती ने पांडवों को बताया कि कर्ण उनका बड़ा भाई था। यह सच जानकर युधिष्ठिर को बहुत दुख और पछतावा हुआ, क्योंकि उन्होंने अपने ही भाई के खिलाफ युद्ध किया था। युधिष्ठिर को लगा कि अगर यह सच पहले पता होता, तो महाभारत का युद्ध टल सकता था। उन्होंने गुस्से में आकर कहा कि आगे से कोई भी महिला किसी बात को पूरी तरह छुपाकर नहीं रख पाएगी। इस कथा के आधार पर माना जाता है कि महिलाएं कोई भी बात ज्यादा समय तक छिपाकर नहीं रख पाती हैं। हालांकि, यह सिर्फ एक पौराणिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

राजा परीक्षित को मिला था मृत्यु का श्राप

कथानुसार, राजा परीक्षित की कहानी महाभारत के बाद की मानी जाती है और इसे कलयुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए जंगल गए था। वहां उन्हें शमीक ऋषि ध्यान में लीन दिखाई दिए। राजा ने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन ऋषि मौन व्रत में थे, इसलिए उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे नाराज होकर परीक्षित ने गुस्से में आकर एक मरा हुआ सांप उठाया और ऋषि के गले में डाल दिया।

जब यह बात ऋषि के पुत्र को पता चली, तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा को श्राप दे दिया कि 7 दिनों के भीतर सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। कहा जाता है कि श्राप के अनुसार 7वें दिन तक्षक नाम के नाग ने राजा परीक्षित को डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी।

श्रीकृष्ण ने दिया था अश्वत्थामा को श्राप

महाभारत की कथा के मुताबिक, अपने पिता दौणाचार्य की मृत्यु के प्रतिशोध में आकर अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडवों के पुत्रों (उपपांडवों) की हत्या कर दी थी. यह कृत्य युद्ध के नियमों के खिलाफ माना गया था। साथ ही, उन्होंने उत्तरा के गर्भ को भी नष्ट करने की कोशिश की, ताकि अर्जुन का वंश समाप्त हो जाए। इस घटना से दुखी और क्रोधित होकर श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को कठोर श्राप दिया था। श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप देते हुए कहा कि वे कभी मर नहीं पाएंगे और कलयुग के अंत तक धरती पर भटकते रहेंगे।

लोक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और अलग-अलग जगहों पर उनके दिखने की कहानियां सुनने को मिलती हैं, हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है।

कलयुग की अवधि क्या है?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कलयुग की कुल अवधि लगभग 4,32,000 साल मानी गई है कहा जाता। है कि इसकी शुरुआत भगवान कृष्ण के पृथ्वी से जाने के बाद, करीब 3102 ईसा पूर्व में हुई थी। अब तक इसके हजारों साल बीत चुके हैं और यह युग अभी लंबे समय तक चलेगा।

—- समाप्त —-

Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें