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Main Door Toran: घर के मुख्य द्वार पर क्यों लगाना चाहिए प्राकृतिक तोरण? जानें आम और अशोक के पत्तों का महत्व !

Main Door Toran: घर के मुख्य द्वार पर क्यों लगाना चाहिए प्राकृतिक तोरण? जानें आम और अशोक के पत्तों का महत्व !
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Main Door Toran: शुभ अवसरों व त्योहारों पर लोग घर के मुख्य द्वार पर तोरण या वंदनबार अवश्य लगाते हैं। भारतीय संस्कृति में तोरण का महत्व महज घर की सजावट तक सीमित नहीं है। यह घर में सुख समृद्धि और सम्पन्नता के साथ नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता को दर्शाता है। इसलिए घर के मुख्य द्वार को तीज त्योहार व मांगलिक कार्यों के अवसर पर प्राकृतिक चीजों (आम, अशोक के पत्तों व फूलों) से बने तोरण से सजाना चाहिए। न कि प्लास्टिक से बने पत्तों और पूलों से।

कभी सोचा है कि नीम, पीपल, बरगद या अन्य पेड़ों के पत्तों के स्थान पर सिर्फ आम और अशोक के पत्तों का ही उपयोग क्यों किया जाता है तोरण बनाने में और घर के मुख्य द्वार पर तोरण क्यों लगाया जाता है। इसका जवाब है कि तोरण हमेशा ऐसे वृक्ष के पत्तों से बनाया जाता है जो फलदायक होने के साथ हर तरह से उपयोगी हों। कुछ स्थानों पर केले के पत्तों का भी प्रयोग होता है।

मुख्य द्वार पर तोरण का महत्व

मुख्य द्वार को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है, जहां से घर के सभी सदस्यों, मेहमान आदि सभी को प्रवेश करने पर अवश्य गुजरना पड़ता है। यानी घर में प्रवेश करते समय मुख्य द्वार का साफ सुथरा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होने हर उस व्यक्ति को प्रभावित करता है, जो घर के अन्दर प्रवेश करता है। इसलिए घर के मुख्य द्वार को सकारात्मक रखने पर जोर दिया जाता है।

आम व अशोक के पत्तों को क्यों माना जाता है शुभ?

आम के पत्तों का उपयोग कलश स्थापना, पूजा और मांगलिक कार्यों में किया जाता है। आम का वृक्ष फल, छाया और हरियाली प्रदान करता है, इसलिए इसे जीवन, उर्वरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसके हरे पत्ते ताजगी और नई शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं। अशोक वृक्ष को भारतीय परंपरा में शुभता व प्रसन्नता से जोड़ा जाता है। अशोक शब्द का अर्थ शोक से रहित होना है। इसी प्रतीकात्मक अर्थ के कारण मांगलिक अवसरों पर अशोक के पत्तों का उपयोग किया जाता है।

गेंदे के पीले और नारंगी फूल क्यों लगाए जाते हैं?

गेंदे के फूल भारतीय पूजा-पद्धति और त्योहारों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। इनका चमकीला पीला और नारंगी रंग उत्साह, ऊर्जा, आनंद और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। पीले रंग को धार्मिक परंपराओं में ज्ञान और शुभता से, जबकि नारंगी रंग को उत्साह तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। वहीं गेंदे के पीला रंग भूमि तत्व को प्रदर्शित करता है जो जीवन में स्थिरता को दर्शाता है। पीला रंग जीवन में उमंग और उत्साह के साथ ग्रहों के देव गुरु बृहस्पति को भी प्रदर्शित करता है।

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Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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