Jagannath Rath Yatra 2025: आज पूरे देश में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और धूमधाम के साथ शुरू हुई। गुजरात के अहमदाबाद, ओडिशा के पुरी और राजस्थान के उदयपुर समेत कई शहरों में यह धार्मिक उत्सव परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सजी इस यात्रा की शुरुआत अहमदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी से हुई, जबकि पुरी में दोपहर 1 बजे भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान कर यात्रा की रस्में शुरू की गईं।
अहमदाबाद: 147वीं रथ यात्रा का शुभारंभ
अहमदाबाद में रथ यात्रा की शुरुआत शुक्रवार सुबह जमालपुर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से हुई। सुबह 5 बजे से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को रथों पर विराजमान करने की विधि शुरू हुई। मंगला आरती में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने परिवार के साथ शामिल हुए और भगवान से आशीर्वाद लिया। इसके बाद भगवान को पारंपरिक खिचड़ी भोग अर्पित किया गया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘पाहिंद विधि’ निभाई, जिसमें सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को शुद्ध किया गया। अहमदाबाद की यह रथ यात्रा शहर की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। यात्रा रात करीब 8:30 बजे मंदिर वापसी के साथ संपन्न होगी।
पुरी: सबसे पुरानी और ऐतिहासिक रथ यात्रा
पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष महत्व है। यहां की यात्रा को देखने देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। शुक्रवार को दोपहर 1 बजे भगवान को रथों पर विराजमान किया गया और शाम 4 बजे से रथ खींचने की रस्म शुरू हुई। ओडिशा के राजा गजपति महाराज ने परंपरागत ‘छेरा पन्हारा’ विधि निभाई, जिसमें वे सोने की झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं।
पुरी में भगवान के विशाल रथ – नंदीघोष (जगन्नाथ), तालध्वज (बलभद्र) और पद्मध्वज (सुभद्रा) को रस्सियों से खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है, जहां भगवान कुछ दिन विश्राम करते हैं।
रथ यात्रा 2025: पूरा शेड्यूल
- 27 जून, शुक्रवार – रथ यात्रा प्रारंभ
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। - 1 जुलाई, मंगलवार – हेरा पंचमी
देवी लक्ष्मी नाराज होकर भगवान से मिलने आती हैं। यह प्रेम और रुठने-मनाने की एक रोचक परंपरा है। - 4 जुलाई, शुक्रवार – संध्या दर्शन
भक्तों को विशेष दर्शन की अनुमति मिलती है। हजारों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर में दर्शन करते हैं। - 5 जुलाई, शनिवार – बहुदा यात्रा
भगवान वापस अपने मूल मंदिर की ओर लौटते हैं और रास्ते में मौसी मां के मंदिर पर रुकते हैं, जहां उन्हें पोडा पिठा भोग चढ़ाया जाता है। - 6 जुलाई, रविवार – सुना बेशा
भगवानों को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। यह दृश्य अत्यंत भव्य और दुर्लभ होता है। - 7 जुलाई, सोमवार – अधरा पना
भगवानों को एक खास मीठा पेय ‘अधरा पना’ अर्पित किया जाता है, जो परंपरागत मसालों और दूध-पनीर से बनता है। - 8 जुलाई, मंगलवार – नीलाद्रि विजय
रथ यात्रा का अंतिम दिन, जब भगवान अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं और गर्भगृह में पुनः विराजते हैं।
महिलाओं की विशेष भागीदारी: ऑपरेशन सिंदूर थीम
इस वर्ष की रथ यात्रा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक विशेष पहल के अंतर्गत महिला रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इसमें महिलाओं ने उत्साह से भाग लेकर न केवल श्रद्धा का परिचय दिया, बल्कि सामाजिक समानता का संदेश भी दिया। पारंपरिक वस्त्रों में सजी महिलाएं रथ यात्रा की शोभा बनीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रथ यात्रा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को ढेरों शुभकामनाएं। श्रद्धा और भक्ति का यह पर्व सबके जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। जय जगन्नाथ!”













