Janmashtami 2025 : जन्माष्टमी के मौके पर कान्हा जी के साथ साथ राधा जी का पूजन भी किया जाता है। वैसे भी राधा नाम बिना कृष्ण अधूरे हैं और राधा नाम मिल जाए तो कृष्ण भी पूरे हो जाते हैं। राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी के बारे में न जाने कितने बार कहा, लिखा और सुना गया है। भगवान कृष्ण हमारी किशोरी जी को अगाध प्रेम करते हैं लेकिन एक बार एक ऐसी भी घटना हुई कि भगवान कृष्ण ने राधा जी को शाप दे दिया। वो भी ऐसा वैसा शाप नहीं दिया, उन्हें कभी संतान न होने का शाप दिया। आइये जानते हैं, भगवान कृष्ण ने ऐसा शाप क्यों दिया। इसके पीछे की वजह क्या थी।
राधाजी के मन में आई पुत्र की इच्छा
बताया जाता है कि एक समय की बात है, जब दिव्य लोग में राधा जी और भगवान कृष्ण रास विलास कर रहे थे। तभी राधा जी के मन में पुत्र पैदा करने की इच्छा उत्पन्न हुई। अब जब राधा जी खुद सभी इच्छाओं से परिपूर्ण हैं तो उनके मन में ये इच्छा क्यों आई? किसी के मन में ये सवाल भी आ सकता है, तो क्रीड़ा तो आनंद के ही निमित्त होती है। इसका कोई उद्देश्य तो होता नहीं है। ऐसे में क्रीड़ा क्रीड़ा में इच्छा पैदा हो गई। अब जब राधा जी को इसकी इच्छा हुई तो उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। जब राधा रानी जी इतनी सुंदर हैं तो उनका पुत्र भी बहुत सुंदर हुआ।
राधाजी के आचरण के बाद कान्हा ने दिया शाप
कथा बताती है कि एक दिन पुत्र ने जम्हाई ले ली। कहते हैं जब उन्होंने जम्हाई ली तो उनके पेट में पंचभूत, आकाश, पाताल, वन, पर्वत, पेड़, अहंकार, प्रकृति, पुरुष सभी दिखाई देने लगे। राधिका जी को बड़ा खराब सा लगा कि कैसी अलाई बलाई सब इनके मुंह में हैं और कैसा ही ये विराट छोकरा हुआ है। इस पर उन्होंने जल में रख दिया। वही विराट पुरुष हुए और उन्हीं से सभी ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। वहीं जब राधाजी का इस तरह का अजीब व्यवहार भगवान श्रीकृष्ण ने देखा तो उन्होंने किशोरी जी को शाप दे दिया। श्रीकृष्ण ने राधाजी को शाप दिया कि अब उन्हें कभी भी संतान का लाभ नहीं मिलेगा। वह संतानहीन रहेंगी। इसी वजह से राधा जी का एक नाम कृशोदरी भी पड़ा है।













