Surya Ko Jal Chadhane Ke Mantra : हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के मुख्य स्रोत हैं। मान्यता है कि रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है, और इस दिन यदि विधिपूर्वक सूर्य को अर्घ्य दिया जाए और मंत्रों का जाप किया जाए, तो जातक को अनेक प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं। इससे न सिर्फ जीवन में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि करियर और कारोबार में भी तरक्की के द्वार खुलते हैं।
शास्त्रों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि रविवार को सूर्य को जल अर्पण करते समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना बेहद फलदायक होता है। इन मंत्रों के प्रभाव से जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, दुख-दर्द दूर होते हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
🌞 सूर्य को जल चढ़ाने की विधि:
रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में उठें और स्नान करें।
तांबे के लोटे में साफ जल लें और उसमें लाल पुष्प, चावल (अक्षत) तथा रोली डालें।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं।
दोनों हाथों से लोटा पकड़कर ऊँचाई से जल अर्पित करें ताकि सूर्य की किरणें जल से होकर आपकी आंखों तक पहुंचें।
जल चढ़ाते समय नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें।
🔆 सूर्य को जल चढ़ाते समय बोले जाने वाले मंत्र:
ॐ सूर्याय नमः
– यह छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावशाली बीज मंत्र है। इसका 11 बार जप करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।
ॐ घृणिः सूर्याय नमः
– यह सूर्य अर्घ्य का वैदिक मंत्र है। जल चढ़ाते समय इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥
– यह सूर्य गायत्री मंत्र है, जो ज्ञान, तेज और ऊर्जा प्रदान करता है। इसका 3 या 9 बार जप करें।
✨ लाभ:
स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोगों से रक्षा मिलती है।
नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के योग बनते हैं।
मानसिक तनाव दूर होता है और आत्मबल बढ़ता है।
पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
हर रविवार यदि श्रद्धा और नियमितता से सूर्य को जल अर्पित करते हुए इन मंत्रों का जाप किया जाए, तो जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि निश्चित रूप से प्राप्त होती है।













