Pitru Paksha 2025: श्राद्ध में काले तिलों से तर्पण होता है। काले तिलों से ही पितृ देवता तृप्त होते हैं। गरुड़ पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि तिल मेरे पसीने से निकले हैं। चूंकि श्रीकृष्ण श्याम छवि के हैं और भवसागर से पार लगाने वाले हैं। काले तिलों से तर्पण किया जाता है, काले तिल काल के प्रतीक हैं, एक तिल का दान, स्वर्ण के 32 सेर तिल के बराबर है। तिल दान से अभीष्ट सन्तान की प्राप्ति होती है और शनि, राहु जनित दोष सहित अनेक दोषों का निवारण होता है। पितृ पक्ष में पितरों को श्रद्धापूर्वक याद कर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिलांजलि देने से पितृ देवता तृप्त होते हैं और कल्याण करते हैं।
कौआ – कहा जाता है कि कौआ भी यम पक्षी है। काले रंग का है और वह भी काल को पहले से ही पढ़ लेता है। सदियों पुरानी कहावत है, कौआ यदि घर की मुंडेर पर बैठ जाए तो मान लिया जाता है कि मेहमान आने वाला है, वहीं कौआ किसी के सिर पर बैठ जाए तो उसे बहुत अशुभ माना जाता है। ग्रामीण अंचलों में जब कभी किसी के सिर पर कौआ बैठ जाता है, तो उसे संकट से बचाने के लिए लोग उस व्यक्ति की मृत्यु की
सूचना झूठ-मूठ रिश्तेदारों को दे देते हैं, फिर बाद में बताते हैं कि कौआ बैठने के कारण यह भ्रमित सूचना दी गई है, ऐसा करने से माना जाता है कि व्यक्ति सुरक्षित रहता है, उस पर संकट टल जाता है। कौआ श्राद्ध में आपको पितृ की याद दिलाता है, इस नाते यम का एक अंश कौओं को भी दिया जाता है।
कुत्ता – मनुष्य के लिए सबसे वफादार कुत्ता है। मान्यताओं के अनुसार कुत्ता भैरव जी की सवारी के कारण यम पशु है, वह भी काल का प्रतीक है। जरा सी आहट होने और अनहोनी की आशंका होते ही कुत्ता सोते हुए भी जाग जाता है। कुत्ते को भोजनांश देने का अर्थ यह है कि हमारे पितृ जहां भी जिस योनि में हों, सुरक्षित रहें। भारतीय ज्योतिष में जन्मपत्री में केतु की पीड़ होने पर कुत्ते की देखभाल, सेवा एवं भोजन देने से अनिष्ट केतु का प्रकोप समाप्त होता है, जिससे जीवन में अचानक चमत्कारिक परिवर्तन आते हैं। मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में कौए, कुत्ते और गाय को भोजन का अंश देने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है तथा पितरों के आशीर्वाद से रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं।













