Pitru Paksha 2025 Daan: पितृ पक्ष का समय बहुत ही पवित्र और खास माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष के समय लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए पिंडदान और दान करते हैं। पितृपक्ष के वक्त किए गए दान से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और मनुष्य जीवन से ग्रह दोष भी शांत हो जाता है साथ ही घरों में खुशी और सुख समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार हमारे जीवन पर ग्रहों का गहरा प्रभाव पड़ता है और जब गृह आसन या प्रेरित होते हैं तो लोगों के जीवन में बढ़ाएं बीमारियां और आर्थिक कठिनाई जैसी समस्या आने लगती है। बीमारियों और जीवन में बढ़ाओ को दूर रखने के लिए पितृपक्ष के समय ध्यान रखना चाहिए और दान करना चाहिए। पितृपक्ष में दान करने से ग्रहों की नकारात्मकता कम होती है और उनके शुभ फल भी मिलते हैं। दान करना शुभ माना जाता है। पितृपक्ष को ग्रह शांति का विशेष समय भी माना जाता है।
पितृपक्ष में दान करने का महत्व
दान करना सेवा त्याग और आभार व्यक्त करने के सामान्य होता है। परंपरा नहीं है यह दूसरों की सहायता और पितरों को संतोष दिलाने का एक तरीका है। दान करने से न केवल हमें पुण्य मिलता है बल्कि हमारे घर में सुख समृद्धि और धन की वृद्धि भी होती है। दान करने से ग्रह दोष भी काम होता है और ग्रह पर प्रसन्न होकर मनुष्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
पितृपक्ष में क्या दान करें और उनका ग्रहों से क्या संबंध है
1. अनाज
अनाज हमारे जीवन का आधार है पितृ पक्ष में अनाज दान करने से घर में अन्य की कभी कमी नहीं होती है। चावल चंद्रमा से जुड़ा है इसलिए दान करने से मानसिक शांति और परिवार में सकारात्मक और सामंजस्य आता है, जिस आत्मविश्वास और स्वास्थ्य मजबूत होता है।
2. काला तिल
दिल को दान करने के लिए एक बहुत ही पवित्र चीज माना गया है। तिल का प्रयोग पितरों के तर्पण के लिए भी किया जाता है। काला तिल शनि ग्रह से संबंधित होता है इसका दान करने से शनि के कष्ट काम होते हैं और जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
3. कपड़े
की आत्मा को प्रसन्नता मिलती है और व्यक्ति को सम्मान और आत्मविश्वास भी मिलता है इसलिए कपड़ों का दान करना चाहिए। सफेद कपड़े चंद्रमा नीले कपड़े शनि पीले कपड़े बृहस्पति से जुड़े माने जाते हैं। की शांति के लिए संबंधित रंग के कपड़े दान करना शुभ माना गया है।
4. गुड और चना
गुड और चने का दान बहुत ही सरल और प्रभावी है इससे मिठास और सहयोग की भावना बढ़ती है। अच्छा सूर्य मंगल से संबंधित होता है इसे दान करने से हमारे जीवन में ऊर्जा साहस और आत्मबल बढ़ता है। चना मंगल और शनि को शांत करने में मदद करता है।
5. गाय को हरा चारा या भोजन कराएं
हिंदू शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता माना जाता है। गाय की सेवा करना पुण्य का काम होता है। गौ सेवा सबसे बड़ा दान भी माना गया है। गौ सेवा से पितरों को असीम शांति मिलती है। गौ सेवा करने से और गाय को चारा खिलाने से हमारे सभी ग्रह संतुलित रहते हैं और शुक्र और चंद्रमा भी संतुलित रहते हैं।
6. पानी का दान करें
जल दान बहुत ही जीवन दायिनी होता है इससे हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। जल चंद्रमा और शुक्र से जुड़ा होता है इससे भावनात्मक संतुलन और परिवार में प्रेम की भावना बढ़ती है।
7. काला कपड़ा या जूते
काला कपड़ा में ध्यान करने से सुरक्षा और स्थिरता जीवन में बढ़ती है। यह शनि को शांत करता है और जीवन में कारण रुकावट दूर होती है।
पितृपक्ष में हमेशा दान निष्काम भाव से करना चाहिए। दान करते समय पितरों और भगवान का स्मरण करना चाहिए। जरूरतमंद, ब्राह्मण, वृद्धि और असहाय लोगों को दान करना शुभ माना गया है। इससे हमारे ग्रह दोष पितृ दोष काम होते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है। दान करने से हमारा स्वास्थ्य स्वस्थ रहता है और मानसिक शांति बनी रहती है। हिंदू धर्म के अनुसार दान ही सबसे बड़ा धर्म है इसलिए इस पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर दान करें जिससे आपके जीवन में खुशियां आएगी। माना जाता है। पितृपक्ष को ग्रह शांति का विशेष समय भी माना जाता है।













