हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस कालखंड में अपने पूर्वजों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। जो लोग सच्चे मन से श्रद्धा और नियमों के साथ पितृपक्ष का पालन करते हैं, उनके जीवन से कष्ट दूर होकर सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि पितृपक्ष समाप्त होने से पहले कुछ सरल उपाय अवश्य करने चाहिए, जिससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
पितृपक्ष में अपनाने योग्य उपाय
-
तर्पण और पिंडदान करें
गंगा या किसी पवित्र नदी-तालाब में तर्पण करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। यदि संभव न हो तो घर पर भी विधि-विधान से तर्पण किया जा सकता है। -
गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं
पितृपक्ष में भोजन दान का विशेष महत्व है। श्रद्धा से किया गया अन्नदान पितरों तक पहुंचता है और परिवार में अन्न-धान्य की कमी नहीं रहती। -
कौवों और गाय को खिलाएं
शास्त्रों में बताया गया है कि कौवा पितरों का प्रतीक है और गाय मां का रूप। इन्हें भोजन खिलाने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। -
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं
संध्या समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। -
मंत्र जप और पितृ स्तुति करें
पितरों के नाम का स्मरण, “ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का जप या पितृ स्तोत्र का पाठ करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
पितृपक्ष केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर न केवल पितरों को तृप्त किया जा सकता है, बल्कि परिवार पर आशीर्वाद और सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है।













