हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उपवास रखती हैं। साल 2025 में करवा चौथ का व्रत सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा। यह दिन बेहद खास होगा क्योंकि चतुर्थी तिथि का आरंभ सुबह 06 बजकर 23 मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन 14 अक्टूबर को सुबह 04 बजकर 15 मिनट पर होगा।

करवा चौथ 2025 का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ पर पूजा और कथा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजन का समय शाम 05 बजकर 56 मिनट से रात 07 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस समय के दौरान महिलाएं सजधज कर करवा माता की पूजा करती हैं, करवा चौथ की कथा सुनती हैं और अपने व्रत का पालन करती हैं। शुभ मुहूर्त में किया गया पूजन जीवनसाथी के लिए मंगलकारी माना जाता है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति कराता है।
करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है चंद्रमा का उदय। इस समय का इंतजार पूरे दिन महिलाएं करती हैं। वर्ष 2025 में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में चंद्रमा का उदय रात 08 बजकर 23 मिनट पर होगा। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में चंद्रोदय का समय भिन्न हो सकता है। इसलिए महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग या कैलेंडर के अनुसार सही समय देखें।
करवा चौथ पूजन विधि और परंपराएं
करवा चौथ की पूजा विधि बेहद खास और परंपरागत होती है। सुबह स्नान करके महिलाएं निर्जला उपवास का संकल्प लेती हैं। पूरे दिन वे जल और भोजन का सेवन नहीं करतीं। शाम को करवा माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पूजा स्थल को सजाया जाता है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। करवे में जल, मिठाई, पान, सुपारी, चावल और श्रृंगार की सामग्री रखी जाती है और उसे विधिवत अर्पित किया जाता है।रात को जब चंद्रमा उदित होता है तो महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और उसके बाद अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं।
करवा चौथ व्रत का महत्व
करवा चौथ व्रत का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी गहरा है। यह व्रत पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है। यही कारण है कि इस दिन महिलाएं पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ उपवास रखती हैं।
सोमवार को करवा चौथ का विशेष महत्व
वर्ष 2025 का करवा चौथ खास इसलिए भी है क्योंकि यह सोमवार के दिन पड़ रहा है। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इसलिए इस बार करवा चौथ का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
जहां एक ओर करवा चौथ परंपरा और आस्था का प्रतीक है, वहीं आधुनिक दौर में यह त्योहार नए रूप में भी मनाया जाने लगा है। अब कई पति भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखते हैं और उनके स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना करते हैं। सोशल मीडिया और फिल्मों के कारण करवा चौथ अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी यह पर्व लोकप्रिय होता जा रहा है।
करवा चौथ और स्वदेशी परंपराएं
करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और ज्यादातर घरेलू सामान से पूजा करती हैं। यह त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी परंपराओं को भी संजोए हुए है। करवे, मिट्टी के दीपक, श्रृंगार सामग्री और लोकगीत आज भी करवा चौथ को उसकी जड़ों से जोड़ते हैं।
करवा चौथ का पर्व केवल उपवास रखने की परंपरा नहीं है बल्कि यह दांपत्य जीवन में विश्वास और प्रेम को और मजबूत बनाने का दिन है। वर्ष 2025 में यह पर्व सोमवार, 13 अक्टूबर को पड़ रहा है और सोमवार होने के कारण इसका महत्व दोगुना हो गया है। महिलाएं इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।













