Alakshmi Story in Hindi: लाल-लाल आंखें, दुर्बल और मैला शरीर और तन पर गंदे कपड़े और लोहे के आभूषण… कुछ ऐसी है मां लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी की छवि। मां लक्ष्मी से बिल्कुल उलट। जहां मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं तो वहीं उनकी बहन अलक्ष्मी जहां निवास करती हैं वहां दरिद्रता, दुख, क्लेश आदि होता है। उनकी कहानी बड़ी रोचक है। अलक्ष्मी को क्यों मां लक्ष्मी की बहन माना जाता है और कैसे उनके विवाह के लिए देवी लक्ष्मी स्वयं भगवान विष्णु से अड़ गई थीं। साथ ही अलक्ष्मी का निवास कहां है और उसे अपने घर में प्रवेश करने से कैसे दूर रखा जा सकता है। आइये विस्तार से जानते हैं।
मां लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं अलक्ष्मी
माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी की उद्गम हुआ था। इसी प्रकार कथा यह भी कहती है कि मदिरा के साथ अलक्ष्मी भी समुद्र मंथन से ही निकली थी। इसलिए उन्हें मां लक्ष्मी की बड़ी बहन कहा जाता है। तब मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु ने विवाह करना चाहा लेकिन अलक्ष्मी बड़ी थीं। ऐसे में सनातन धर्म के अनुसार पहले अलक्ष्मी का विवाह होना जरूरी था, तभी छोटी बहन यानी देवी लक्ष्मी का विवाह होता।
क्यों भगवान विष्णु से अड़ गईं देवी लक्ष्मी
चूंकि अलक्ष्मी का स्वरूप कुरूप था और शरीर भी गंदगी से भरा था इसलिए कोई भी उनसे विवाह नहीं करना चाहता था। बताया जाता है कि इसके बाद मां लक्ष्मी भगवान विष्णु से जिद पर अड़ गईं कि पहले अलक्ष्मी का विवाह होगा, इसके बाद ही वह उनके साथ शादी करेंगी। इसके बाद भगवान विष्णु को अलक्ष्मी के विवाह के लिए इंतजाम करना पड़ा। उन्होंने उद्दालक ऋषि को अलक्ष्मी से विवाह के लिए मनाया। इसके बाद उन दोनों का विवाह हुआ।
अलक्ष्मी का निवास कहां पर है
विवाह के बाद अलक्ष्मी को लेकर उद्दालक ऋषि अपने आश्रम में पहुंचे लेकिन अक्ष्मी ने वहां जाने से इनकार कर दिया। तब ऋषि ने पूछा कि आपका निवास कहां है। इस पर अलक्ष्मी ने बताया कि जहां गंदगी होती है। लड़ाई झगड़ा होता है। मांस-मदिरा का सेवन होता है। अधर्म के काम होते हैं। वह ऐसे घरों में निवास करती हैं। तब उद्दालक ऋषि अलक्ष्मी को पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उनके लिए उचित स्थान ढूंढने के लिए चले गए।
अलक्ष्मी से कैसे बच सकते हैं
पीपल के पेड़ के नीचे बैठे-बैठे अलक्ष्मी को काफी समय बीत गया और उद्दालक ऋषि नहीं आए तो वह दुखी हो गईं। बड़ी बहन को दुखी देखकर मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपनी व्यथा कही। तब श्रीहरि विष्णु ने कहा कि पीपल मेरा ही निवास है, ऐसे में अलक्ष्मी यहां पर निवास कर सकती है। तब से अलक्ष्मी का निवास पीपल के पेड़ के नीचे माना जाता है। साथ ही पीपल की पूजा करने वाले को अलक्ष्मी नुकसान नहीं पहुंचाती है। इसके साथ ही कहा जाता है कि अलक्ष्मी को खट्टा और मिर्च वाला भोजन पसंद है। इसीलिए घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर नींबू मिर्च टांगा जाता है ताकि अलक्ष्मी वहीं से भोजन करके लौट जाए। अंदर प्रवेश न करे। इसके साथ ही जहां साफ-सफाई हो, धार्मिक गतिविधियां हों, वहां भी अलक्ष्मी का प्रवेश नहीं होता है।













