Dev Deepawali 2025 : कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आज पूरे देश में Dev Deepawali का पावन पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। विशेष रूप से काशी नगरी में यह पर्व अद्भुत और दिव्य दृश्य प्रस्तुत करता है। आज गंगा घाटों पर लाखों दीये जलाकर भगवान शिव की आराधना की जाएगी। यह पर्व न केवल भक्ति का, बल्कि प्रकाश और पुण्य का प्रतीक माना जाता है।
देव दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, इस वर्ष देव दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
कार्तिक पूर्णिमा तिथि 5 नवंबर की सुबह 4:17 बजे से 6 नवंबर की सुबह 2:47 बजे तक रहेगी। इस दौरान गंगा स्नान, दीपदान और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर उतरकर काशी में दीपदान करते हैं।
देव दिवाली का धार्मिक और पौराणिक महत्व
देव दिवाली को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। शिवपुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का संहार किया था।त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने दीप जलाकर महादेव की जय-जयकार की थी, और तभी से इस पर्व को देवों की दिवाली कहा जाने लगा।यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय, अहंकार पर विनम्रता और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
काशी में होगी भव्य देव दीपावली
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट तक गंगा तटों पर लाखों दीये जलाकर यह उत्सव मनाया जाएगा।गंगा आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और विशेष शिव पूजा के साथ यह आयोजन पूरे देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के लिए विशेष इंतज़ाम किए हैं।देव दिवाली का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरण और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है।लोग अपने घरों और मंदिरों को दीपों से सजाकर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का आह्वान करते हैं।
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