Dev Deepavali 2025 : कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनाई जाने वाली देव दीपावली इस बार एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रही है। इस वर्ष देव दीपावली सोमवार के दिन पड़ रही है, जो भगवान शिव को समर्पित माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार “शिववास योग” बन रहा है, जिससे इस पर्व का आध्यात्मिक प्रभाव और बढ़ गया है। कहा जाता है कि जब देव दीपावली सोमवार को आती है और शिववास योग बनता है, तो इसका फल हजार गुना अधिक शुभकारी होता है।
देवताओं की दीपावली का दिव्य पर्व
देव दीपावली को देवताओं की दीपावली कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा से जागते हैं और देवताओं को आशीर्वाद देते हैं। इसी प्रसन्नता में देवता स्वर्गलोक में दीप प्रज्वलित करते हैं, जबकि धरती पर गंगा तटों पर दीपों की श्रृंखलाएं सजाई जाती हैं। काशी, प्रयागराज, अयोध्या और हरिद्वार जैसे तीर्थों पर इस पर्व की भव्यता देखते ही बनती है।
शिव पूजन और दीपदान का विशेष महत्व
शिववास योग के कारण इस बार शिव आराधना का विशेष महत्व रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किया गया रुद्राभिषेक, दीपदान और दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की उपासना इस दिन अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
जानें पूजन और दीपदान का शुभ मुहूर्त
देव दीपावली पर पूजन और दीपदान का शुभ समय सायं 5 बजकर 10 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 14 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होकर 15 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इस अवधि में गंगा स्नान, दीपदान और शिव पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है।
शांति और समृद्धि का संदेश देता पर्व
मान्यता है कि देव दीपावली के दिन घर, मंदिर और नदी तट पर दीप जलाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख, सौभाग्य व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष देव दीपावली का यह शिवमय संयोग भक्तों के लिए हर दृष्टि से मंगलकारी और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है।













