वउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी या देव जागरण एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, इस वर्ष अत्यंत शुभ योग में मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा से जागते हैं, और इसी के साथ शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस बार यह पावन पर्व 1 नवंबर 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
देवउठनी एकादशी का ब्रह्म मुहूर्त और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त का शुभ समय सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इस समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।व्रतधारी प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें, तुलसी के पौधे के पास दीप जलाएं और भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प और पंचामृत का भोग लगाएं। इस समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
एक उपाय जो बना सकता है आपको धनवान
शास्त्रों में कहा गया है कि देवउठनी एकादशी की सुबह अगर कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करता है और गरीबों को दान देता है, तो उसके घर में कभी धन की कमी नहीं होती।यदि आप इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं या तुलसी के पौधे की पूजा कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से समृद्धि की प्रार्थना करते हैं, तो घर में स्थायी सुख-समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है।इसके अलावा इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और कंबल का दान करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद, कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है।देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही देवताओं, ऋषियों और समस्त प्राणियों में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि इस दिन को देव जागरण पर्व कहा जाता है।इस दिन से ही विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो जाती है।
क्या करें और क्या न करें
इस दिन व्रतधारी को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और पूरे दिन सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों से परहेज करें। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और तुलसी विवाह का आयोजन करें।रात्रि में दीयों से घर को सजाएं और प्रार्थना करें कि भगवान विष्णु आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें।
देवउठनी एकादशी का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आस्था और अध्यात्म से जुड़ा एक महान पर्व भी है। यह दिन व्यक्ति को कर्म, भक्ति और दान के मार्ग पर अग्रसर करता है। जो व्यक्ति इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-अर्चना करता है, तुलसी के पौधे के नीचे दीप जलाता है और गरीबों की मदद करता है, उस पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है।इसलिए कल के देवउठनी एकादशी पर शुभ मुहूर्त में पूजा जरूर करें और वह एक दीपक तुलसी के नीचे अवश्य जलाएं, जो आपके जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि का प्रकाश बन जाएगा।













