धनतेरस, दीपावली का पहला और खास दिन, इस साल 2025 में आज मनाया जा रहा है। इसे धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन सोना, चांदी, तांबा और अन्य घरेलू वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनतेरस के शुभ समय में की गई खरीदारी से घर में समृद्धि बनी रहती है और वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस, दीपावली पर्व का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से धन, संपत्ति और समृद्धि का प्रतीक है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर का पूजन करने से घर में धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है। लोग इस दिन सोने, चांदी, तांबा और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं, क्योंकि यह विश्वास किया जाता है कि धनतेरस के शुभ समय में खरीदी गई वस्तुएं लंबी अवधि तक लाभकारी रहती हैं। इसके अलावा, इस दिन घर की सफाई, सजावट और दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर हर कार्य का समय शुभ मुहूर्त के अनुसार तय किया जाता है। इस साल 2025 में धनतेरस की खरीदारी का सबसे शुभ समय शाम 4:30 बजे से लेकर रात 8:15 बजे तक है। इस समय में किसी भी प्रकार की धन-संबंधी वस्तु जैसे सोना, चांदी, तांबा या घरेलू उपकरण खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस समय खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक घर में समृद्धि लाने का माध्यम बनती हैं। इसके साथ ही, इस दिन व्यापारियों के लिए भी धन लाभ और नए व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

पूजन विधि
धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर का विशेष पूजन किया जाता है। पूजा करने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करना आवश्यक है ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो। पूजा स्थल पर देवी और देवता की प्रतिमा या तस्वीर रखी जाती है और उनके सामने दीपक जलाया जाता है। हल्दी-कुंकुम का तिलक लगाने और मंत्रोच्चारण करने के बाद सोने, चांदी या तांबे की वस्तुएं देवी-देवता को अर्पित की जाती हैं। पूजा के अंत में परिवार के सभी सदस्य मिलकर मिठाई और प्रसाद का वितरण करते हैं, जिससे परिवार में खुशहाली और सौहार्द्र बढ़ता है।धनतेरस पर की गई यह पूजा और शुभ खरीदारी न केवल धन-संपत्ति में वृद्धि करती है, बल्कि पूरे वर्ष घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने में भी सहायक होती है। लोग इस दिन नए वस्त्र पहनते हैं, घर को सजाते हैं और दीपक जलाकर देवी-देवताओं का स्वागत करते हैं, जिससे घर और परिवार दोनों में सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस प्रकार धनतेरस का पर्व केवल खरीदारी या पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में खुशहाली और समृद्धि के लिए विश्वास और परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है।













