दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत नरक चतुर्दशी से होती है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। 2025 में नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर को है। हालांकि कुछ क्षेत्रीय पंचांगों में यह 19 अक्टूबर की शाम से शुरू माना जा सकता है, लेकिन मुख्य पूजा और अनुष्ठान का दिन 20 अक्टूबर ही रहेगा।

इस दिन विशेष पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा। प्रातःकाल स्नान और शुद्ध होकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, शाम के समय दीपक प्रज्वलित करना भी भाग्यशाली होता है। घर की सफाई और दीपक जलाने से न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
नरक चतुर्दशी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व भगवान कृष्ण और नरकासुर से जुड़ा हुआ है। पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत दिखाई थी। इस दिन को मनाने का उद्देश्य जीवन में बुराई से दूर रहना और अच्छाई को अपनाना है। इसके साथ ही यह त्योहार घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक भी माना जाता है।
इस दिन लोग सुबह स्नान करके शुद्ध होते हैं और हल्दी तथा चंदन से अपने शरीर को सजाते हैं। पूजा-अर्चना के दौरान नरकासुर वध की कथा सुनना या पढ़ना एक सामान्य परंपरा है। घर की सफाई और दीपक जलाना इस दिन की विशेष परंपरा है, जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नरक चतुर्दशी का यह उत्सव आध्यात्मिक दृष्टि से मन को शुद्ध करता है और बुराई पर अच्छाई की विजय की सीख देता है।
इस वर्ष नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाने का भी प्रतीक है। प्रातःकाल स्नान, पूजा और दीपक प्रज्वलित करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि बुरी शक्तियों से रक्षा भी होती है। इसलिए घर और मन को शुद्ध रखकर इस दिन को श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाना चाहिए।













