देशभर में दशहरा का पर्व हर वर्ष बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व रामायण की कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें भगवान राम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया। इस वर्ष दशहरा 2025 तीन दिन बाद मनाया जाएगा, और लोग इस अवसर पर रावण दहन और पूजा-अर्चना के लिए तैयार हैं। दशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है और यह दिन धर्म, नैतिकता और न्याय का प्रतीक माना जाता है। कथा अनुसार, रावण का वध कर भगवान राम ने सीता माता का अपहरण रोका और अधर्म पर विजय प्राप्त की, यही कारण है कि यह दिन समाज और परिवार में सत्य, साहस और नैतिक मूल्यों के महत्व को दर्शाता है।

रावण दहन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, दशहरा 2025 में रावण दहन का शुभ समय निर्धारित किया गया है। इस समय में रावण के पुतले का दहन करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन रावण दहन करने से केवल बुराई का नाश नहीं होता, बल्कि घर और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का भी वास होता है।देशभर में लाखों श्रद्धालु अपने-अपने क्षेत्रों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार कर उन्हें जलाने के लिए उत्साहित रहते हैं। रावण दहन केवल एक दृश्य मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। लोग इस अवसर पर अपने परिवार और समुदाय के साथ जुड़कर सामूहिक उत्सव मनाते हैं और सामाजिक सद्भावना और सांस्कृतिक एकता को भी महसूस करते हैं।
दशहरा की पूजा और परंपराएं
दशहरा के दिन श्रद्धालु रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करते हैं और शाम को उन्हें जलाकर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक स्थापित करते हैं। इस अवसर पर लोग भगवान राम की पूजा करते हैं और दीप, फूल, धूप और अन्य सामग्रियों से आराधना करते हैं। कई स्थानों पर रामलीला का मंचन भी आयोजित किया जाता है, जिसमें रामायण की कथा का दृश्य रूप प्रस्तुत किया जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि बच्चों और समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कृति की जानकारी देने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
दशहरा और समाज में उसका संदेश
दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज और परिवार के लिए एकता, सहयोग और नैतिक मूल्यों का संदेश भी लेकर आता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि समाज में बुराई पर अच्छाई की विजय हमेशा संभव है और सामूहिक प्रयासों से हर मुश्किल को मात दी जा सकती है। रावण दहन और रामलीला के माध्यम से बच्चों और युवाओं में सत्य, न्याय और धैर्य की भावना विकसित होती है, जिससे समाज में नैतिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्य मजबूत होते हैं।
दशहरा 2025 न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश भी देता है। रावण दहन के शुभ मुहूर्त में भाग लेकर श्रद्धालु अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक जीवंत करते हैं। इस बार दशहरा पर आप भी अपने नजदीकी स्थान पर आयोजित रावण दहन समारोह में शामिल होकर इस पावन अवसर का महत्व समझ सकते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों और सत्य की प्रतिष्ठा को बढ़ावा दे सकते हैं।













