Ganesh Chaturthi 2025: भगवान गणेश को विघ्नविनाशक, प्रथम पूज्य और बुद्धि-विवेक के देवता माना जाता है। वे जहां भी स्थापित होते हैं, वहां से नकारात्मकता और विघ्न स्वतः ही दूर हो जाते हैं। परंतु उनका वाहन चूहा—एक छोटा, सामान्य सा जीव—इतना रहस्यमय और प्रतीकात्मक क्यों है? यही रहस्य जब समझ में आता है तो व्यक्ति की चिंताएं और विपदाएं भी दूर हो सकती हैं।
मूषक: अंतर्यामी ब्रह्म का प्रतीक
“बृहदारण्यक उपनिषद्” में चूहे (मूषक) को अंतर्यामी ब्रह्म का प्रतीक माना गया है। चूहा हर चीज में छुपकर प्रवेश कर सकता है, वह हर प्रकार की रुकावट को भेदने की क्षमता रखता है। यही गुण बुद्धि और विवेक के भी हैं—जो हर समस्या में समाधान खोज सकते हैं, हर बाधा को पार कर सकते हैं।
समृद्धि से संबंध
एक मान्यता यह भी है कि चूहे केवल समृद्ध घरों में ही वास करते हैं। वे वहां सहज विचरण करते हैं जहां अन्न, धन और सुख की अधिकता होती है। इसके विपरीत, जहां दरिद्रता होती है वहां से चूहे भी भाग जाते हैं। इस दृष्टि से मूषक समृद्धि का संकेतक है। जिस घर में चूहे बेखौफ घूमते हैं, वहां विपदाएं नहीं टिकतीं—ऐसा शास्त्रों में कहा गया है।
गणेश जी और गजमुखासुर की कथा
शिवपुराण के अनुसार, एक बार गजमुखासुर नामक दैत्य से युद्ध करते समय गणेश जी का एक दांत टूट गया। क्रोध में आकर उन्होंने उसी दांत से दैत्य पर प्रहार किया। पराजित होकर वह दैत्य चूहे का रूप धारण कर भागने लगा, लेकिन गणेश जी ने उसे पकड़ लिया। भयभीत होकर दैत्य ने क्षमा मांगी और सदैव गणेश जी की सेवा में रहने का वचन दिया। तब से वह मूषक गणेश जी का वाहन बन गया। गणेश जी का वाहन मूषक न केवल उनका आज्ञाकारी सेवक है, बल्कि एक संदेश भी देता है—वह यह कि चाहे समस्या कितनी भी बड़ी हो (दैत्य गजमुखासुर जैसी), विवेक और साहस से उसे पराजित किया जा सकता है। यही कारण है कि चूहा, जो सामान्यतः क्षुद्र माना जाता है, गणेश जी के साथ जुड़कर दिव्यता का प्रतीक बन जाता है।













