Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के त्योहार का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व होता है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पूरे धूमधाम से गणपति बप्पा का स्वागत किया जाता है। इसके लिए लोग कई दिनों पहले से ही तैयारी में लग जाते हैं और गणेशजी को स्थापित करने के बाद उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश को मोदक बेहद प्रिय है और उन्हें मोदक का भोग लगाने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए गणेश पुराण से जानते हैं कि आखिर क्यों गणेश चतुर्थी पर मोदक के भोग के बिना भगवान गणेश की पूजा अधूरी मानी जाती है।
गणेश पुराण में मिलता है मोदक का वर्णन
पुराण के अनुसार, देवताओं ने अमृत से निर्मित एक मोदक माता पार्वती को भेंट में दिया था। दिव्य मोदक को देखकर भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेयजी माता से उसकी मांग करने लगे। तब देवी पार्वती ने मोदक के बारे में बताया कि इसकी गंध मात्र से ही अमरता प्राप्त हो सकती है। ऐसे में इसकी महक लेने वाले को सभी शास्त्रों का ज्ञान, कलाओं का जानकार बन जाता है।
भगवान गणेश ने ऐसे किया तीर्थ भ्रमण
देवी पार्वती से मोदक का महत्व सुनकर गणपतिजी और कार्तिकेयजी को उसे खाने की इच्छा होने लगी। इस पर माता ने कहा कि दोनों में जो भी धर्माचरण द्वारा श्रेष्ठता को प्राप्त करके सबसे पहले सभी तीर्थों का भ्रमण करके यहां पहुंचेगा, उसी को मैं यह मोदक दूंगी। देवी पार्वती की बात सुनकर कार्तिकेयजी मयूर पर बैठकर सभी तीर्थों का स्नान करने लगे। वहीं, गणेशजी का वाहन मूषक होने के चलते वे सभी तीर्थों का भ्रमण न कर सके। तभी उन्होंने दूसरा तरीका अपनाया और माता-पिता के सामने परिक्रमा करते हुए माता और पिता की स्तुति की।
मोदक भगवान गणेश का प्रिय भोग
परिक्रमा पूरी होने के बाद भगवान गणेश माता-पिता के सामने खड़े हो गए। तब माता पार्वती ने कहा की सभी तीर्थ स्थानों का स्नान, देवी-देवताओं को प्रणाम, व्रत, यज्ञों का अनुष्ठान, योग, मंत्र और संयम का पान करना, यह सभी माता और पिता के पूजा के 16वें अंश के समान नहीं हो सकते हैं। ऐसे में ये दिव्य मोदक में तुम्हें देती हूं। सभी शुभ कार्यों और पूजा के दौरान सर्व प्रथम तुम्हारी पूजा होगी। भगवान गणेश को मोदक ग्रहण करके अपार संतुष्टि और प्रसन्नता महसूस हुई। तभी बप्पा के लिए मोदक प्रिय हो गया और यही कारण है कि उनकी पूजा में इसका भोग जरूर लगाया जाता है .4yएक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार परशुरामजी के वार से भगवान गणेश का एक दांत टूट गया था। ऐसे में वे खाने में असमर्थ हो गए थे। तब उनके लिए मुलायम मोदक तैयार किए गए थे, जिसे खाकर भगवान गणेश बेहद प्रसन्न हो गए थे। बप्पा का एक दांत टूटा होने के चलते उन्हें एकदंत के नाम से भी जाना जाता है।













