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Ganesh Chaturthi 2025: जानें कब है गणपति बप्पा का आगमन, स्थापना विधि, शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख

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Ganesh Chaturthi 2025: सनातन परंपरा में भगवान गणेश जी एक ऐसे देवता हैं, जिनकी सबसे पहले पूजा होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार विघ्न-विनाशक भगवान श्री गणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि पर मध्यान्ह के समय हुआ था. यही कारण है कि गणपति के भक्त इस पावन तिथि का इंतजार पूरे साल करते हैं और इस दिन बड़ी धूम-धाम से उनकी अपने घर-आंगन आदि में स्थापना करते हैं. इस साल कब बिठाए जाएंगे गणपति? कब और कैसे करें गणेश पूजा? कब होगी उनकी विदाई? आइए इसे विस्तार से जानते हैं.

गणेश पूजा से जुड़ी परंपरा
सनातन परंपरा में गणेशोत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी के दिन होती है और वह अनंत चतुर्दशी के दिन जाकर पूर्ण होता है. ऐसे में गणपति बप्पा की कृपा पाने के लिए उनके भक्त हर साल गणेश चतुर्थी के दिन उन्हें अपने घर पर लाते हैं और उनकी विधि-विधान से पूजा करने के बाद एक दिन बाद या फिर दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर किसी नदी, पवित्र सरोवर या फिर समुद्र में ले जाकर विधि-विधान से विसर्जन करते हैं.

गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश जी को घर में बिठाने के लिए दोपहर का समय चुनें क्योंकि हिंदू मान्यता के अनुसार उनका जन्म इसी समय हुआ था. पंचांग के अनुसार इस साल भगवान श्री गणेश जी की मध्यान्ह पूजा का शुभ मुहूर्त 27 अगस्त 2027, बुधवार के दिन रहेगा। इस दिन गणेश भक्त सुबह 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट के बीच श्री गणेश जी की पूजा कर सकेंगे। इस प्रकार गणपति के भक्तों को उनकी पूजा करने के लिए लगभग ढाई घंटे मिलेंगे.

कैसे करें गणपति की पूजा
हिंदू मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश भक्त को प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले गणेश चतुर्थी व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद घर के ईशान कोण में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणपति की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए. इसके बाद गणेश जी पर गंगाजल छिड़कर उनका स्नान कराएं और फिर उसके बाद सिंदूर का तिलक लगाकर पूरे विधि-विधान से पूजा करें.

गणेश चतुर्थी की पूजा में गणपति को उनकी प्रिय चीजें जैसे दूर्वा, नैवेद्य, मोतीचूर का लड्डू, मोदक, नारियल, गन्ना, आदि अर्पित करने के बाद उनकी चालीसा या फिर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए. पूजा के अंत में घंटा, घड़ियाल, शंख, मजीरा आदि के साथ उनकी आरती करना चाहिए. गणेश चतुर्थी के दिन सायंकाल भी विधि-विधान से गणपति की पूजा का यह क्रम दोहराएं और किसी ब्राह्मण या पुजारी को भोजन-प्रसाद कराने के बाद स्वयं भी ग्रहण करें.

कब होगा गणपति विसर्जन?
हिंदू मान्यता के अनुसार 10 दिनों तक भगवान श्री गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने के बाद जब उनकी विदाई का समय आता है तो वह​ दिन उनकी कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन होता है. यही कारण है कि इस दिन गणेश भक्त गाजे-बाजे के साथ उनको शुभ मुहूर्त में विदा करते हैं. पंचांग के अनुसार इस साल गणपति विसर्जन 06 सितंबर 2025 को हागा.

Shivani Verma
Author: Shivani Verma

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