Translate Your Language :

Latest Updates
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी? जानें दाल, चावल और हल्दी का ग्रहों से कनेक्शन World largest Shivling Bihar: गजब का संयोग! जिस तिथि को पहली बार शिवलिंग की पूजा हुई थी, उसी दिन बिहार में स्थापित होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग Ramayan And Mahabharat Eras Temples: ये हैं भारत के वो 5 मंदिर, जिनका रामायण और महाभारत काल से है अस्तित्व Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा पर इन चीजों का दान होता है शुभ, घर में आता है धन-वैभव! New Year 2026 Upay: नए साल पर चुपचाप करें ये खास उपाय, पूरे साल नहीं होगी धन की कमी Premanand Maharaj: ना पैसा, ना सफलता दे पा रही खुशी? प्रेमानंद महाराज ने खोला सच्चे आनंद का रहस्य Golden Temple New Year Guide: नए साल पर स्वर्ण मंदिर जाने का है प्लान? दर्शन समय से लेकर सेवा नियम तक जानें सबकुछ Garuda Purana: कौन कर सकता है अविवाहित व्यक्ति का श्राद्ध? Maa Pitambara Peeth : युद्धों से लेकर सत्ता तक, आस्था का अटूट विश्वास New Year 2026: नए साल के पहले दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना साल भर पड़ेगा पछताना!
Home » Uncategorized » Garuda Purana: कौन कर सकता है अविवाहित व्यक्ति का श्राद्ध?

Garuda Purana: कौन कर सकता है अविवाहित व्यक्ति का श्राद्ध?

Facebook
X
WhatsApp

हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले कर्मकांड बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण करने बाद ही आत्मा को शांति प्राप्त होती है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसका विवाह न हुआ हो तो उसके श्राद्ध का अधिकार किसके पास है? गुरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में शामिल है.गरुड़ पुराण में इस बारे में साफ तौर पर और विस्तार से बताया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किसी अविवाहित व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसका श्राद्ध कर्म कौन कर सकता है? इसके लिए गरुड़ पुराण में क्या नियम बताए गए हैं?

पिता करता है श्राद्ध कर्म

शास्त्रों में बताया गया है कि पुत्र द्वारा पिता का श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिससे पिता को मुक्ति मिल जाती है. वहीं अगर पुत्र अविवाहित हो और उसकी असमय मृत्यु हो जाए तो उसके पास न पत्नी होती है और न ही संतान. ऐसी स्थिति में पुत्र के श्राद्ध कर्म का दायित्व और अधिकार पिता का होता है. पिता ही मुख्य कर्ता की भूमिका निभाता है, ताकि उसके पुत्र की आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त हो सके.अगर मरने वाले व्यक्ति के पिता संसार में न हों या फिर सेहत की वजह से श्राद्ध कर्म करने में असमर्थ हों तो पिता के बाद छाटे या बड़े भाई पर इस दायित्व को निभाने की जिम्मेदारी आ जाती है. अगर मृतक का कोई भाई नहीं है, तो फिर पिता के भाई यानी चाचा श्राद्ध कर्म कर सकते हैं. इसके अलावा कोई नजदीकी न हो तो उसके परिवार के किसी भी व्यक्ति द्वारा ये काम किया जा सकता है.

अविवाहित आत्मा के लिए विशेष काम

अविवाहित मृत्यु को अपूर्ण जीवन माना जाता है. ऐसी आत्माओं के लिए सामान्य श्राद्ध कर्म तो किए जाते हैं. साथ ही गरुड़ पुराण के अनुसार, ऐसी आत्माओं की शांति के लिए कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं. अकाल मृत्यु होने पर नारायण बलि की पूजा करवानी चाहिए. मान्यता है कि इससे आत्मा प्रेत योनि से मुक्त होती है और उसे पितृ लोक में स्थान मिलता है.

Madhumita Verma
Author: Madhumita Verma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें