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Golden Temple New Year Guide: नए साल पर स्वर्ण मंदिर जाने का है प्लान? दर्शन समय से लेकर सेवा नियम तक जानें सबकुछ

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Golden Temple Darshan New Year 2026: नए साल की शुरुआत अगर शांति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करनी हो, तो स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब), अमृतसर से बेहतर स्थान शायद ही कोई हो. यही कारण है कि हर साल 1 जनवरी को लाखों की संख्या में श्रद्धालु अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर माथा टेकने पहुंचते हैं. सिख धर्म का यह सबसे पवित्र तीर्थस्थल न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि सेवा, समानता और मानवता का अद्भुत संदेश भी देता है. अगर आप नए साल पर स्वर्ण मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां जानिए दर्शन समय, नियम, सेवा की प्रक्रिया, VIP दर्शन, कैसे पहुंचें और आसपास घूमने की जगहों की पूरी जानकारी.

स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

स्वर्ण मंदिर न केवल सिखों का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए शांति और भाईचारे का प्रतीक है. महाराजा रणजीत सिंह ने इसके ऊपरी हिस्से को सोने से ढंकवाया था, जिसके बाद इसे गोल्डन टेम्पल कहा जाने लगा. यहां का मुख्य आकर्षण पवित्र सरोवर के बीच स्थित गर्भगृह है, जहां गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ निरंतर चलता रहता है.

दर्शन का समय और नियम

स्वर्ण मंदिर के द्वार सभी धर्मों और समुदायों के लिए 24 घंटे खुले रहते हैं.

पालकी साहिब सेवा

सुबह लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच गुरु ग्रंथ साहिब को अकाल तख्त से मुख्य मंदिर लाया जाता है.यह दृश्य बेहद अलौकिक होता है.

प्रवेश के नियम

मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले सिर ढंकना अनिवार्य है. यदि आपके पास रुमाल नहीं है, तो प्रवेश द्वार पर निःशुल्क स्कार्फ उपलब्ध होते हैं.

अनुशासन

जूते और मोजे उतारकर ‘जोड़ा घर’ में जमा करने होते हैं और नंगे पैर पानी से हाथ-पैर धोकर ही अंदर जाना होता है.

तंबाकू और शराब

परिसर के भीतर किसी भी प्रकार का नशा, सिगरेट या तंबाकू ले जाना सख्त मना है.

क्या स्वर्ण मंदिर में VIP दर्शन की व्यवस्था है?

स्वर्ण मंदिर में VIP दर्शन की कोई व्यवस्था नहीं है. सिख धर्म में समानता का बहुत महत्व है, इसलिए कोई भी हो सबको एक ही कतार में लगकर दर्शन करने होते हैं. बुजुर्गों या दिव्यांगों के लिए सेवादार कभी-कभी सहयोग करते हैं, लेकिन अलग से किसी के लिए कोई VIP दर्शन की व्यवस्था नहीं है.

लंगर और कारसेवा

स्वर्ण मंदिर का लंगर दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोइयों में से एक है. यहां हर दिन हजारों लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं. आप यहां बर्तन धोने, सब्जियां काटने या लंगर परोसने की सेवा कर सकते हैं. लंगर में भोजन करते समय जमीन पर बैठना होता है और भोजन का अपमान न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है.

दिल्ली से स्वर्ण मंदिर, अमृतसर कैसे जाएं?

दिल्ली से अमृतसर की दूरी लगभग 450 किलोमीटर है. जहां आप देश के किसी भी हिस्से से आ सकते हैं. यहां पहुंचने के तीन प्रमुख साधन हैं.

ट्रेन से

दिल्ली से अमृतसर के लिए कई सुपरफास्ट और शताब्दी ट्रेनें उपलब्ध है.

यात्रा समय: लगभग 67 घंटे

फ्लाइट से

दिल्ली से अमृतसर की फ्लाइट

उड़ान समय: लगभग 1 घंटा 15 मिनट

एयरपोर्ट से स्वर्ण मंदिर की दूरी: करीब 13 किमी

सड़क मार्ग से

आप अपनी कार या वोल्वो बस से NH44 के जरिए जा सकते हैं.

दूरी: लगभग 450 किमी

समय: 89 घंटे (NH-44 के जरिए)

अमृतसर में अन्य दर्शनीय स्थल

जलियांवाला बाग

स्वर्ण मंदिर के बिल्कुल पास स्थित यह ऐतिहासिक स्थल भारत की आजादी की लड़ाई की याद दिलाता है.

वाघा बॉर्डर

अमृतसर से लगभग 30 किमी दूर स्थित इस बॉर्डर पर शाम को होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी बेहद जोश भरी होती है.

दुर्गियाना मंदिर

इसकी बनावट स्वर्ण मंदिर जैसी ही है और यह माँ दुर्गा को समर्पित है.

विभाजन संग्रहालय

यह टाउन हॉल के पास स्थित है और देश के बंटवारे की कहानियों को संजोए हुए है.

स्वर्ण मंदिर का धार्मिक महत्व

स्वर्ण मंदिर को हरमंदिर साहिब भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है, ईश्वर का घर, जो सभी के लिए खुला है. यह सिख धर्म के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव जी द्वारा स्थापित किया गया था. मंदिर के चारों ओर से चार द्वार बने हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि यहां हर जाति, धर्म और वर्ग के लोगों का स्वागत है. यहां स्थित अमृत सरोवर में स्नान करना बहुत ही पवित्र माना जाता है.

Madhumita Verma
Author: Madhumita Verma

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