Kartik Purnima 2025 Date : हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन देवता स्वर्ग से उतरकर गंगा नदी में दीपदान करते हैं। इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दोनों ही दृष्टियों से विशेष स्थान है।
तिथि और मुहूर्त
- पंचांग के अनुसार इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा तिथि 13 नवंबर, गुरुवार को प्रारंभ होगी।
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 13 नवंबर दोपहर 1:09 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 14 नवंबर दोपहर 2:35 बजे
- ऐसे में मुख्य स्नान, दान और दीपदान का शुभ मुहूर्त 13 नवंबर की रात्रि को रहेगा। भक्तजन इस समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
पर्व का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दीपदान करने और दान देने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो लोग इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
क्या करें इस दिन
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के बाद भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करें। शाम के समय घर और मंदिर में दीपदान करें। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना गया है।
इस वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा पर सिद्ध योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया पूजन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता हैकार्तिक पूर्णिमा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और भक्ति का प्रतीक भी है। इस दिन ईश्वर की आराधना और दीपदान से जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
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