Kashi Vishwanath Temple : सावन का पवित्र महीना जैसे-जैसे करीब आ रहा है, काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) काशी विश्वनाथ मंदिर में प्लास्टिक पर रोक: जानें भगवान शिव का अभिषेक किस धातु के लोटे से करना है शुभप्रशासन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त घोषित कर दिया है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब भक्त प्लास्टिक के किसी भी पात्र में दूध या जल लेकर मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह नियम सावन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थायी रूप से लागू रहेगा। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि भगवान शिव का अभिषेक करने में किस धातु के लोटे का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही जानिए पीतल, तांबा आदि धातुओं के लोटे से जलाभिषेक करने का महत्व और उसके लाभ।
प्लास्टिक प्रतिबंध का उद्देश्य
यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और मंदिर परिसर की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्लास्टिक से न केवल मंदिर परिसर की सफाई प्रभावित होती है, बल्कि यह धार्मिक दृष्टि से भी अनुचित माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं को अब पूजा-अर्चना के लिए धातु के पात्रों का ही उपयोग करना होगा।
ऐसे में सवाल उठता है—शिवजी का जलाभिषेक किस धातु के लोटे से करें? जानिए कौन-से धातु का लोटा कौन-से फल देता है:
तांबे का लोटा – क्रोध पर नियंत्रण और आत्मबल में वृद्धि तांबा अग्नि तत्व और मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।
शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जलाभिषेक करने सेपित्त दोष और त्वचा रोगों में राहत मिलती है
रक्त शुद्धि होती है क्रोध और मानसिक अशांति में कमी आती है
आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है
किसके लिए श्रेष्ठ: छात्र, नौकरीपेशा, गुस्सैल स्वभाव वाले व्यक्ति
पीतल का लोटा – गुरु दोष शांति और वैवाहिक सुख
पीतल बृहस्पति ग्रह से जुड़ा होता है। यदि पीतल के लोटे से गाय का दूध, शुद्ध जल और थोड़ा शहद मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाया जाए, तो:
गुरु दोष शांत होता है
वाणी दोष दूर होता है
विवाह और संतान की बाधाएं दूर होती हैं
धार्मिकता और मानसिक शुद्धता बढ़ती है
किसके लिए उपयोगी: विद्यार्थी, अध्यापक, वैवाहिक जीवन में समस्याओं से जूझ रहे लोग
चांदी का लोटा – मन की शांति और पारिवारिक सौहार्द
चांदी चंद्र ग्रह और मानसिक स्थिरता से जुड़ी है। चांदी के लोटे से गंगाजल, गुलाबजल या केवड़ा जल से अभिषेक करने पर:
मानसिक तनाव, अनिद्रा और अवसाद से राहत मिलती है
चंद्र दोष व कालसर्प योग की शांति होती है
घर में प्रेम और मानसिक संतुलन बना रहता है
किसके लिए उपयुक्त: विवाहित जोड़े, मानसिक रूप से अशांत व्यक्ति
सोने का लोटा – सभी ग्रहों की शांति और राजयोग की प्राप्ति
सोना सूर्य और उच्च ऊर्जा का प्रतीक है। स्वर्ण लोटे से अभिषेक करना:
आत्मबल, यश, तेज और राजयोग की प्राप्ति में सहायक है
सभी नौ ग्रहों की शांति मिलती है
आध्यात्मिक ऊर्जा और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है
स्टील का लोटा न करें इस्तेमाल
स्टील को शास्त्रों में अशुद्ध माना गया है क्योंकि यह लोहे, क्रोमियम और निकल जैसे धातुओं का मिश्रण होता है। धार्मिक अनुष्ठानों में:
स्टील से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है
यह न तो पंचधातु में शामिल है और न ही आध्यात्मिक रूप से शुभ
शिवाभिषेक या किसी देवता की पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है













