हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना का पर्व माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व है और इन दिनों में व्रत, पूजा और साधना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि का आठवाँ दिन जिसे महाअष्टमी कहते हैं, विशेष रूप से शक्ति और भक्ति के लिए समर्पित होता हैमहाअष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भक्त पूरे विधि विधान से दुर्गा पूजा करते हैं और विशेष रूप से कन्या पूजन का आयोजन करते हैं। कन्या पूजन का धार्मिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे स्त्रियों और कन्याओं का सम्मान करने का पर्व माना जाता है। इसे करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और समग्र कल्याण की प्राप्ति होती है।
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महाअष्टमी कब है
वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी 27 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह दिन नवरात्रि के आठवें दिन के रूप में आता है और पूरे दिन माता दुर्गा की आराधना, हवन, भजन और कीर्तन के माध्यम से उनकी शक्ति का अनुभव करने का समय होता है।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त:
महाअष्टमी पर वैसे तो कोई विशेष योग नहीं बन रहा है. लेकिन इस दिन प्रात: संध्या मुहूर्त से आप कन्या पूजन की शुरुआत कर सकते हैं, जो सुबह 5 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है जो कि सुबह 11 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा.
कन्या पूजन करने की विधि
घर में या पूजा स्थल पर साफ-सुथरा स्थान तैयार करें और वहां आसन बिछाएं ,8 या 9 कन्याओं को आमंत्रित करें और उन्हें सम्मान दें फूल, मिठाई, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित करें माता दुर्गा के मंत्रों का पाठ करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें पूजन के बाद कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें सम्मानित करेंकन्या पूजन का यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह महिलाओं और कन्याओं के सम्मान का संदेश देता है और समाज में समानता और करुणा की भावना को बढ़ाता है।
महाअष्टमी का महत्व
महाअष्टमी के दिन विशेष रूप से देवी दुर्गा के लिए हवन और पूजा का आयोजन किया जाता है। यह दिन शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दिन माता दुर्गा की आराधना कर अपने घर और जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सामूहिक कल्याण की कामना करते हैं। मंदिरों में विशेष भजन, कीर्तन और आरती का आयोजन होता है और भक्त पूरी निष्ठा के साथ व्रत रखते हैं।इस प्रकार शारदीय नवरात्र और महाअष्टमी का पर्व न केवल आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी हमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग का संदेश देता है। कन्या पूजन और महाअष्टमी के दिन की गई पूजा से घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह पर्व हर वर्ग के लोगों को जोड़ने का भी माध्यम बनता है।













