शारदीय नवरात्र का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार माता दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का प्रतीक है और भक्त इस नौ दिवसीय व्रत और साधना के माध्यम से अपनी भक्ति और आस्था को प्रकट करते हैं। महाअष्टमी का दिन इन नौ दिनों में विशेष महत्व रखता है। यह दिन माता दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी के पूजन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और कन्या पूजन से जीवन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और घर में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।महाअष्टमी का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन माता महागौरी की भक्ति और पूजा से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और व्यक्ति के सभी पाप क्षय होते हैं। यही कारण है कि पूरे भारत में भक्तजन इस दिन विशेष व्रत रखते हैं, माता की आराधना करते हैं और कन्याओं के प्रति विशेष श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कन्या पूजन की परंपरा और उसका महत्व
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इसे नौ कन्याओं और एक भैरव की पूजा करने के रूप में माना जाता है। हिंदू धर्म में कन्या पूजन को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्याओं को आमंत्रित करके उनके चरण धोकर उनका स्वागत करना, उन्हें सम्मान देना, हलवा-पूरी, चने और मिठाई का भोग लगाना और उपहार भेंट करना इस दिन की परंपरा है।भक्तजन मानते हैं कि इस दिन की गई सच्ची भक्ति और कन्या पूजन से माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। पूजा के दौरान कन्याओं के चरण स्पर्श कर उनके आशीर्वाद को ग्रहण करना बेहद शुभ फलदायी होता है। यह कार्य केवल धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह परंपरा बच्चों और समाज में प्रेम, सौहार्द और सहानुभूति की भावना को बढ़ावा देती है।
महाअष्टमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, महाअष्टमी तिथि 29 सितंबर की रात 11:58 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर की रात 9:45 बजे तक रहेगी। कन्या पूजन के लिए सबसे शुभ समय प्रातःकाल से मध्याह्न तक माना गया है। विशेष रूप से सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय कन्या पूजन और माता महागौरी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।इस दौरान भक्तगण सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। फिर घर या मंदिर में माता महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके दीप, धूप, फूल, अक्षत और पंचामृत से पूजा करते हैं। इसके बाद कन्याओं को आमंत्रित कर उनका स्वागत किया जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है और भेंट दी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और उसकी मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास में सहायक होती है।

पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ
महाअष्टमी के दिन कन्याओं को आमंत्रित करके उनके पैर धोकर उन्हें आसन पर बैठाना, प्रसाद और भेंट देना, और पूरी विधि से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन की गई सच्ची भक्ति से माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं और जीवन की सभी बाधाओं और दुखों को दूर करती हैं।पूजा के बाद माता के चरणों में झुककर आशीर्वाद लेना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई भक्ति और पूजा से न केवल पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है, बल्कि बच्चों का मनोबल भी बढ़ता है और समाज में प्रेम और सौहार्द की भावना प्रबल होती है।
महाअष्टमी नवरात्रि के नौ दिनों में सबसे शक्तिशाली और शुभ दिनों में से एक मानी जाती है। इस दिन किया गया कन्या पूजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और परिवार तथा समाज में खुशहाली का संचार करता है। माता महागौरी की आराधना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कल महाअष्टमी पर माता रानी की पूजा और कन्या पूजन करने से केवल धार्मिक पुण्य ही नहीं मिलता, बल्कि यह बच्चों और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी याद दिलाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्य और पूजा से न केवल घर में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता की भावना भी प्रबल होती है। भक्तगण इस अवसर का लाभ उठाकर माता दुर्गा की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना सकते हैं।













