स्वरूपिणी शक्ति हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति मानी जाती हैं। राधा का स्वरूप पूर्णत: माधुर्य और प्रेम से भरा है, जहां ईश्वर से आत्मिक मिलन और भक्ति की पराकाष्ठा दिखाई देती है।वहीं, मां दुर्गा शक्ति और सामर्थ्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिन्हें जगत जननी और त्रिगुणात्मिका कहा गया है। उनका स्वरूप तेजस्वी और उग्र है, जो अधर्म और अन्याय का संहार करती हैं। दुर्गा मां की आराधना से भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा प्राप्त होती है।
प्रेमानंद महाराज ने भक्तों के सवाल का दिया सरल उत्तर
धार्मिक और आध्यात्मिक चर्चाओं में अक्सर यह सवाल उठता है कि राधा रानी और मां दुर्गा में क्या अंतर है। दोनों ही देवी शक्तियों का स्वरूप हैं, लेकिन उनकी आराधना और महत्व अलग-अलग रूप में किया जाता है। इसी विषय पर प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में स्पष्ट और सरल उत्तर देकर भक्तों के मन की जिज्ञासा शांत की।
राधा रानी – प्रेम और भक्ति की स्वरूपिणी
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं। उनका स्वरूप पूर्णत: माधुर्य और प्रेम से भरा है। राधा जी को भक्ति की सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। उनका नाम लेने से ही मन में पवित्रता, शांति और भगवान के प्रति आत्मीय लगाव उत्पन्न हो जाता है।राधा रानी ईश्वर के साथ आत्मा को प्रेम से जोड़ने का माध्यम हैं।उनका जीवन संदेश है कि भक्ति का सबसे ऊँचा रूप प्रेम है।राधा जी का स्वरूप कोमल, मधुर और करुणामयी माना जाता है।
मां दुर्गा – शक्ति और सामर्थ्य की अधिष्ठात्रीवहीं, प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि मां दुर्गा शक्ति और सामर्थ्य की देवी हैं। वे त्रिगुणात्मिका हैं और उनका स्वरूप तेजस्वी और उग्र है।मां दुर्गा का उद्देश्य अधर्म और अन्याय का नाश करना है।वे असुरों का संहार कर धर्म और सत्य की रक्षा करती हैं।दुर्गा मां की पूजा से भक्तों को साहस, शक्ति और सुरक्षा की प्राप्ति होती है।उनका स्वरूप रक्षक और संहारक दोनों रूपों में पूजनीय है दोनों स्वरूपों का महत्व प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भले ही राधा रानी और मां दुर्गा का स्वरूप अलग हो, लेकिन दोनों ही ईश्वर की दिव्य शक्तियाँ हैं।
राधा रानी – भक्ति, प्रेम और माधुर्य की प्रतीक।
मां दुर्गा – शक्ति, सामर्थ्य और रक्षा की प्रतीक।pre
उन्होंने बताया कि जैसे जीवन में प्रेम और भक्ति जरूरी है, वैसे ही सुरक्षा और शक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। यही कारण है कि दोनों स्वरूपों की आराधना से मनुष्य का जीवन संतुलित और संपूर्ण बनता है।प्रेमानंद महाराज के अनुसार, राधा रानी आत्मा को ईश्वर से प्रेमपूर्वक जोड़ने वाली शक्ति हैं, जबकि मां दुर्गा धर्म और भक्तों की रक्षा करने वाली शक्ति हैं। दोनों ही स्वरूप पूजनीय हैं और जीवन में अलग-अलग लेकिन समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।













