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Sade Sati: वृषभ राशि पर कब से शुरू होगी शनि की साढ़ेसाती? करें ये आसान उपाय और पाएं शनिदेव की कृपा

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Sade Sati: सनातन धर्म में ग्रहों का विशेष महत्व होता है, ग्रहों की सहायता से किसी भी व्यक्ति की पूरी कुंडली बना दी जाती है। और सूर्यपुत्र शनि देव को कर्म और न्याय का देवता माना गया है। शनि की चाल जीवन में सुख-दुख के उतार-चढ़ाव का कारण बनती है। जब किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है, तो उसका जीवन कई मोड़ों से गुजरता है। कुछ के लिए यह संघर्षों भरा समय होता है तो कुछ के लिए तरक्की और सफलता का भी।

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि वृषभ राशि (Taurus) वालों पर शनि की साढ़ेसाती कब से शुरू होगी और कैसे आप कुछ सरल उपाय करके शनिदेव की कृपा पा सकते हैं और अपना बचाव कर सकते है।

वर्तमान में किन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती?

फिलहाल शनि देव मीन राशि में स्थित हैं और यहां उनका दूसरा चरण चल रहा है। जब शनि मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब मीन राशि के जातकों को राहत मिलेगी और मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण शुरू हो जाएगा।

शनि गोचर 2027: वृषभ राशि पर साढ़ेसाती की शुरुआत कब?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 3 जून 2027 को शनिदेव राशि परिवर्तन कर मेष राशि में गोचर करेंगे। इसके बाद जब शनि मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, उसी समय से वृषभ राशि वालों की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। शनि की यह चाल अगले साढ़े सात साल तक वृषभ राशि के जातकों पर प्रभाव डालेगी।

इस समय: कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी। और मीन राशि वालों पर अंतिम चरण शुरू होगा। साथ ही सिंह और धनु राशि वालों को शनि की ढैय्या से राहत मिलेगी।

वृषभ राशि के जातक कैसे पाएं शनि की कृपा?

शनि की साढ़ेसाती के दौरान जीवन में अस्थिरता, मानसिक तनाव, आर्थिक संकट जैसी समस्याएं आ सकती हैं। लेकिन कुछ सरल उपाय करके आप इस प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

1. मां दुर्गा की भक्ति करें: वृषभ राशि की आराध्य देवी मां दुर्गा हैं। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की पूजा करें। दीपक जलाएं, सफेद फूल अर्पित करें और दुर्गा चालीसा या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
2. महादेव का जलाभिषेक करें: शुक्रवार और सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पण करें। यदि संभव हो तो कच्चे दूध से भी अभिषेक करें। यह उपाय मानसिक शांति और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।3. हनुमान जी की उपासना करें: मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनि के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए हनुमान जी की पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
4. सफेद वस्तुओं का दान करें: शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र, चावल, दूध या मिश्री जैसी सफेद चीजों का जरूरतमंदों को दान करें। इससे शुक्र ग्रह की कृपा भी बनी रहती है और जीवन में सुख-सुविधाएं बनी रहती हैं।

शनि देव की साढ़ेसाती को लेकर लोगों में अक्सर डर बना रहता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह समय सिर्फ बुरा ही हो। यह काल आत्ममंथन, कर्म के फल और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला भी होता है। अगर आप मेहनत, भक्ति और धैर्य से काम लें, तो यही साढ़ेसाती आपके जीवन को नई दिशा दे सकती है। क्यूंकी शुरुआत में ही हमने जाना था, शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जिससे वह मेहनती लोगों के साथ अगर न्याय करते हैं, तो उन्हें सुख-समृद्धि सब कुछ भर भर के देते हैं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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