Translate Your Language :

Latest Updates
Rudraksha ke Niyam: रुद्राक्ष पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना हो सकता है नुकसान Lakshmi Puja on Friday: इस दिन नहीं खानी चाहिए खट्टी चीजें, मां लक्ष्मी हो जाती हैं नाराज? Magh Mela 2026: संगम की रेती पर सजे ये 5 जायके, जिनके बिना अधूरा है आपका प्रयागराज ट्रिप Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी? जानें दाल, चावल और हल्दी का ग्रहों से कनेक्शन World largest Shivling Bihar: गजब का संयोग! जिस तिथि को पहली बार शिवलिंग की पूजा हुई थी, उसी दिन बिहार में स्थापित होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग Ramayan And Mahabharat Eras Temples: ये हैं भारत के वो 5 मंदिर, जिनका रामायण और महाभारत काल से है अस्तित्व Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा पर इन चीजों का दान होता है शुभ, घर में आता है धन-वैभव! New Year 2026 Upay: नए साल पर चुपचाप करें ये खास उपाय, पूरे साल नहीं होगी धन की कमी Premanand Maharaj: ना पैसा, ना सफलता दे पा रही खुशी? प्रेमानंद महाराज ने खोला सच्चे आनंद का रहस्य Golden Temple New Year Guide: नए साल पर स्वर्ण मंदिर जाने का है प्लान? दर्शन समय से लेकर सेवा नियम तक जानें सबकुछ
Home » व्रत एवं त्यौहार » Sawan 2025: सावन में ली भोलेनाथ ने अद्भुत परीक्षा ,देखा किसमें है सच्ची भक्ति ?

Sawan 2025: सावन में ली भोलेनाथ ने अद्भुत परीक्षा ,देखा किसमें है सच्ची भक्ति ?

Facebook
X
WhatsApp

Sawan 2025: शिव पर है विश्वास तो पूरी होगी आस, इसमें कोई दो राय नहीं है। एक भक्त के विश्वास में है तर्क और दूसरे भक्त के विश्वास में है समर्पण का भाव, जानें इसका रहस्य। एक बार सावन के महीने में प्रसिद्ध शिव मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी हुई थी तभी अचानक आकाश मार्ग से एक सोने की थाली प्रकट हुई और भविष्यवाणी हुई कि जो कोई भगवान शिव का सच्चा भक्त होगा, उसे आशीर्वाद स्वरूप यह सोने की थाली प्राप्त होगी, यह सुनते ही बड़े-बड़े महात्मा, दानी, भक्त पधारे और थाली को उठाने का प्रयास करने लगे।

सर्वप्रथम मंदिर के प्रधान पुजारी आगे आए और बोले मैं प्रतिदिन महादेव का अभिषेक करता हूं अतः मैं भोलेनाथ का सबसे निकटवर्ती भक्त हूं इसलिए सोने की थाली मुझे ही मिलनी चाहिए। जैसे ही पंडित जी ने थाली उठाई, थाली पीतल की हो गई। इस प्रकार वहां उपस्थित सभी लोगों ने खुद को आजमाया लेकिन उनमें से कोई भी सच्चे भक्त के मानक में खरा नहीं उतरा। जिस व्यक्ति ने बहुत बड़ी रकम दान दक्षिणा के रूप में देकर मंदिर बनवाया था, उसने भी प्रयास किया लेकिन वह भी सोने की थाली रूपी आशीर्वाद प्राप्त न कर सका।

उसी समय मंदिर में एक साधारण व्यक्ति ने प्रवेश किया। उसने भी भविष्यवाणी के बारे में सुना था लेकिन वह शिवजी के दर्शन में इतना मगन था कि उसने सोने की थाली की परवाह नहीं की। जब वह व्यक्ति मंदिर से पूजा करके जा रहा था तो किसी ने कहा कि मंदिर में आए सभी लोगों ने प्रयास किया है, तुम भी प्रयास करके देख लो, कहीं सच्चे भक्त तुम तो नहीं।

जैसे ही उस व्यक्ति ने थाली उठाई, थाली उसके हाथ में चमकने लगी जिसे देखकर सभी लोग जयकारा लगाने लगे और एक सच्चे शिव भक्त की पहचान हुई। कुछ लोगों ने सच्चे भक्त से पूछा कि वह कैसे भक्ति करता है, जिससे महादेव उससे इतने प्रसन्न हैं। तब वह व्यक्ति बोला, ईश्वर की भक्ति के साथ मैं अपना कार्य पूरे मनोयोग से करता हूं तथा नित्य थोड़ा सा समय निकाल कर जरूरतमंदों की मदद करता हूं, क्योंकि उसने सुना है कि दूसरों की निःस्वार्थ मदद करने वालों की मदद स्वयं भगवान करते है।

रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है कि शिवरूप परमात्मा सभी प्राणियों के हृदय में ही स्थित है। काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह का आवरण हटने पर शिव कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है। भक्तों के परम कल्याण और पूर्ण लाभ के लिए शुभ आचरण युक्त भक्ति अनिवार्य है।

Shivani Verma
Author: Shivani Verma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें