नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का विशेष अवसर होता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और भक्तजन पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं। नवरात्रि में कई लोग घर में अखंड दीप जलाते हैं, जो पूरे नौ दिनों तक बिना बुझाए लगातार जलता है। यह दीप न सिर्फ आस्था का प्रतीक होता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता लाने वाला माना जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार अखंड दीप जलाने की सही दिशा क्या होनी चाहिए? गलत दिशा में दीपक रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो सकता है। आइए जानते हैं वास्तु के नियमों के अनुसार दीपक की दिशा और उससे जुड़ी जरूरी बातें।

अखंड दीप किस दिशा में जलाना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार अखंड दीपक को पूर्व दिशा या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना सबसे शुभ माना जाता है। ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती हैं और देवी शक्ति की कृपा पाने के लिए यह स्थान आदर्श होता है।
पूर्व दिशा – यह दिशा सूर्य के उदय की है, जो प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। यहां दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।
उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) – यह दिशा देवताओं का स्थान मानी जाती है। यहां दीप जलाने से घर में आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
बता दें कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र शुरू होती हैं, और नवमी तिथि पर इसका समापन होता है. इसके अगले दिन दशहरा या विजयादशमी पर्व मनाया जाता है. इस साल 22 सितंबर रात 1:23 बजे से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होकर 23 सितंबर को देर रात रात 2:55 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर को मानी जाएगी. इसी दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी और कलश स्थापना भी इसी दिन की जाएगी. वहीं 31 सितंबर को महाअष्टमी और 1 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी. इसके बाद 2 अक्टूबर को दशहरा महापर्व मनाया जाएगा.













