Yam dwitiya 2025: कार्तिक शुक्ल द्वितीया को एक सुंदर उत्सव होता है, जिसका नाम है भ्रातृ द्वितीया या यम द्वितीया। भविष्य पुराण में आया है कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने यम को अपने घर पर भोजन के लिए निमंत्रित किया, इसी से इसे संसार में यम द्वितीया के नाम से घोषित किया गया।
समझदार लोगों को इस दिन अपने घर में मध्याह्न का भोजन नहीं करना चाहिए। उन्हें अपनी बहन के घर में स्नेहवश खाना चाहिए। ऐसा करने से कल्याण और समृद्धि प्राप्त होती है। बहनों को भेंट दी जानी चाहिए। सभी बहनों को स्वर्णाभूषण, वस्त्र, आदर-सत्कार एवं भोजन देना चाहिए। यदि बहन न हो, तो अपने चाचा या मौसी की पुत्री या मित्र की बहन को बहन मानकर ऐसा करना चाहिए।
भ्रातृ द्वितीया का उत्सव एक स्वतंत्र कृत्य है, लेकिन यह दीवाली के तीन दिनों में संभवत: इसलिए मिला लिया गया कि इसमें बड़ी प्रसन्नता एवं आह्लाद का अवसर मिलता है। भाई दरिद्र हो सकता है, बहन अपने पति के घर में संपत्ति वाली हो सकती है। वर्षों से भेंट नहीं हो सकी है आदि-आदि कारणों से द्रवीभूत होकर हमारे प्राचीन लेखकों ने इस उत्सव की परिकल्पना कर डाली है। भाई-बहन एक दूसरे से मिलते हैं। बचपन के सुख-दुख को याद करते हैं। इस कृत्य में धार्मिकता का रंग भी जोड़ दिया गया है।
पद्मपुराण में ऐसा आया है कि जो व्यक्ति अपनी विवाहिता बहनों को वस्त्रों एवं आभूषणों से सम्मानित करता है, वह वर्ष भर किसी झगड़े में नहीं पड़ता। न उसे किसी तरह के शत्रुओं का भय रहता है। भविष्योत्तर एवं पद्मपुराण में कहा गया है- जिस दिन यम को यमुना ने इस लोक में स्नेहपूर्वक भोजन कराया, उस दिन जो व्यक्ति अपनी बहन के हाथ का बनाया हुआ भोजन करता है, वह धन और सुंदर भोजन पाता है।
वैदिक काल तथा मनुस्मृति जैसी आरंभिक काल की स्मृतियों के काल में भाई से विहीन कुमारियों के विवाह में कठिनाई होती थी, किंतु इसी भावना या व्यवहार से भ्रातृ द्वितीया का उद्गम मान लेना उचित नहीं है।
यम द्वितीया या भाई दूज कब है: इस साल यम द्वितीया या भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। यम द्वितीया पर अपराह्न मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से दोपहर 03 बजकर 28 मिनट तक है। पूजन की कुल अवधि 02 घंटे 15 मिनट की है।













