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Karwa Chauth Today: सुहागिनों के लिए खास है आज का दिन, सोलह श्रृंगार से चंद्रमा को अर्घ्य देने तक जानें रस्में !

Karwa Chauth Today: सुहागिनों के लिए खास है आज का दिन, सोलह श्रृंगार से चंद्रमा को अर्घ्य देने तक जानें रस्में !
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Karwa Chauth Today:  करवा चौथ का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है। आज 29 अक्टूबर, गुरुवार को महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रख रही हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत शाम की पूजा और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। इस दिन घरों में पूजा की तैयारी, सोलह श्रृंगार, करवा की थाली और चांद देखने की रस्म की जाती है।

करवा चौथ को सिर्फ व्रत का दिन नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और भरोसे को महत्व देने वाले पर्व के रूप में भी देखा जाता है। अगर आप आज व्रत रख रही हैं, तो जानिए पूजा का समय, चांद कब दिखाई देगा, पूजा कैसे करें, कौन-से मंत्र पढ़ें और अलग-अलग राशियों की महिलाएं किन बातों का ध्यान रख सकती हैं।

करवा चौथ 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय

करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, लखनऊ में 29 अक्टूबर को पूजा का मुहूर्त शाम 5:26 बजे से 6:43 बजे तक है। चंद्रमा के उदय का अनुमानित समय रात 8:06 बजे है। चतुर्थी तिथि रात 10:09 बजे तक रहेगी।

करवा चौथ की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार

पूजा का मुहूर्त: शाम 5:26 से 6:43 बजे तक

चंद्रोदय का समय: रात करीब 8:06 बजे, लखनऊ

चतुर्थी तिथि समाप्त: रात 10:09 बजे

ये समय लखनऊ के लिए हैं। दिल्ली, पटना, जयपुर, भोपाल और दूसरे शहरों में चांद निकलने का समय अलग हो सकता है। अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से जरूर जांचें।

करवा चौथ पर सरगी कब खाएं?

सरगी सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला भोजन है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मेवे, मिठाई, मठरी या घर में बने दूसरे पकवान रखे जाते हैं। कुछ परिवारों में सरगी के साथ कपड़े और श्रृंगार का सामान देने की भी परंपरा है।

सरगी का कोई एक समय सभी शहरों के लिए तय नहीं होता। इसे स्थानीय सूर्योदय से पहले और परिवार की परंपरा के अनुसार ग्रहण किया जाता है। दिनभर उपवास रखना हो तो सरगी में अपनी सेहत के मुताबिक पौष्टिक भोजन लें और सूर्योदय से पहले पर्याप्त पानी पी लें।

करवा चौथ का व्रत क्यों रखा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की पूजा की जाती है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।

करवा चौथ से जुड़ी कथाओं में वीरवती की कथा प्रमुख है। लोकप्रचलित कथा में वीरवती अपने भाइयों के छल के कारण चंद्रमा निकलने से पहले व्रत खोल देती हैं और इसके बाद उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कथा सुनने का उद्देश्य व्रत के नियम, धैर्य और श्रद्धा के महत्व को याद करना माना जाता है। अलग-अलग इलाकों में कथा के विवरण में अंतर मिल सकता है।

करवा चौथ की पूजा विधि

पूजा की तैयारी पहले से कर लेने पर शाम को जल्दबाजी नहीं होती। व्रत रखने वाली महिलाएं इन चरणों के अनुसार पूजा कर सकती हैं।

  • सुबह स्नान करके अपनी परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शाम को पूजा की जगह साफ करें और भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी तथा करवा माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
  • रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप और मिठाई से पूजा करें।
  • करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। परिवार में करवा बदलने की परंपरा हो तो उसे निभाएं।
  • चंद्रमा निकलने पर उसके दर्शन करें और जल से अर्घ्य दें।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखें।
  • इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें।
  • हर परिवार में पूजा का तरीका एक जैसा नहीं होता। इसलिए अपने घर की परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कौन-सा मंत्र पढ़ें?

चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देना करवा चौथ की मुख्य रस्मों में शामिल है। इस दौरान चंद्रदेव को नमन करते हुए आप सरल मंत्र पढ़ सकती हैं।

चंद्र मंत्र: ॐ चंद्राय नमः।

दूसरा मंत्र: ॐ सोमाय नमः।

इन मंत्रों का जाप करते हुए चंद्रमा को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। माता पार्वती की पूजा में यह मंत्र भी पढ़ सकती हैं:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इसका भाव है कि हे माता गौरी, आप मंगल करने वाली हैं। हम आपकी शरण में हैं, हमारी रक्षा करें और हमें आशीर्वाद दें।

करवा चौथ पर छलनी और करवा बदलने की रस्म

करवा चौथ पर छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखने की रस्म कई परिवारों में निभाई जाती है। इसके बाद पति पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। इस परंपरा को प्रेम, साथ और विश्वास से जोड़कर देखा जाता है।

कुछ जगहों पर महिलाएं समूह में बैठकर पूजा करती हैं और एक-दूसरे को करवा देती हैं। सास को बायना या उपहार देने की परंपरा भी कई परिवारों में है। इन रस्मों का तरीका क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकता है, इसलिए किसी एक विधि को सभी के लिए अनिवार्य नहीं मानना चाहिए।

करवा चौथ पर 12 राशियों के लिए पूजा

राशियों के अनुसार ये धार्मिक आस्था और पारंपरिक पूजा से जुड़े हैं।

मेष: माता पार्वती का स्मरण करें। रिश्ते में गुस्से के बजाय शांत बातचीत को महत्व दें।

वृषभ: पूजा में सफेद फूल अर्पित कर सकती हैं। परिवार के साथ समय बिताने और मन की बात साझा करने का संकल्प लें।

मिथुन: पूजा के दौरान मंत्र जाप करें। किसी पुरानी गलतफहमी को दूर करने के लिए जीवनसाथी से खुलकर बात करें।

कर्क: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय परिवार की खुशहाली की कामना करें। भावनाओं में बहकर कोई कठोर बात कहने से बचें।

सिंह: माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें। रिश्ते में एक-दूसरे के सम्मान को प्राथमिकता दें।

कन्या: पूजा की सामग्री व्यवस्थित रखें और व्रत की तैयारी समय से पूरी करें। छोटी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता न करें।

तुला: पूजा के बाद दांपत्य जीवन में प्रेम और संतुलन की प्रार्थना करें। जीवनसाथी की बात ध्यान से सुनें।

वृश्चिक: पूजा करते समय मन शांत रखें। किसी बात को लेकर नाराजगी हो तो उसे बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें।

धनु: भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। परिवार के साथ मिलकर पूजा करने का अवसर निकालें।

मकर: अपनी परंपरा के अनुसार करवा पूजा करें। घर की जिम्मेदारियों में जीवनसाथी का सहयोग करने का संकल्प लें।

कुंभ: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय सुख-शांति की कामना करें। रिश्ते में भरोसा बनाए रखने पर ध्यान दें।

मीन: माता पार्वती की पूजा करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। जीवनसाथी के साथ प्रेम से समय बिताएं।

करवा चौथ के दिन किन बातों का ध्यान रखें?

व्रत के दौरान अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। यदि आपको कोई बीमारी है, नियमित दवा लेती हैं, गर्भवती हैं या डॉक्टर ने उपवास से मना किया है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें। कमजोरी या चक्कर आने पर अपनी स्थिति को गंभीरता से लें।

चांद दिखाई देने में देर हो तो घबराने के बजाय स्थानीय मौसम और चंद्रोदय की जानकारी जांचें। पूजा की सामग्री पहले तैयार रखें और परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत पूरा करें।

करवा चौथ का भाव पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की भलाई की कामना से जुड़ा है। श्रद्धा के साथ पूजा करें और अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।

…….समाप्त……

Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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