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Sharad Purnima 2026: 25 अक्टूबर को बुध-शुक्र की वक्री चाल और विषयोग का साया, जानें क्या होगा असर !

Sharad Purnima 2026: 25 अक्टूबर को बुध-शुक्र की वक्री चाल और विषयोग का साया, जानें क्या होगा असर !
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Sharad Purnima 2026: 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के दिन ग्रहों की स्थिति ज्योतिषीय नजरिए से खास मानी जा रही है। इस बार बुध और शुक्र की वक्री चाल के साथ शनि-चंद्रमा से जुड़े विषयोग की चर्चा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन ग्रहों की स्थिति का असर लोगों के फैसलों, मानसिक स्थिति, रिश्तों और आर्थिक मामलों पर पड़ सकता है। हालांकि, गुरु की मजबूत स्थिति को राहत देने वाला संकेत माना जा रहा है। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ के साथ कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

शरद पूर्णिमा पर ग्रहों की कैसी रहेगी स्थिति?

पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रहेगी। ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक, बुध और शुक्र की वक्री चाल के साथ शनि और चंद्रमा की स्थिति भी चर्चा में रहेगी।

बुध और शुक्र की वक्री चाल का क्या होगा असर?

ज्योतिष में बुध को बुद्धि, संवाद, कारोबार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। वहीं, शुक्र प्रेम, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन दोनों ग्रहों की वक्री चाल के दौरान बातचीत में गलतफहमी, फैसलों में असमंजस और खर्चों को लेकर उलझन जैसी स्थितियां बन सकती हैं। ऐसे समय में किसी भी बड़े आर्थिक फैसले या निवेश से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना बेहतर माना जाता है। रिश्तों में भी जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय बातचीत से समस्याएं सुलझाने की सलाह दी जाती है।

शनि-चंद्रमा का विषयोग क्यों है चर्चा में?

ज्योतिष में शनि और चंद्रमा के बीच बनने वाले संबंध को विषयोग कहा जाता है। चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है, जबकि शनि अनुशासन, जिम्मेदारी और कर्म से जुड़ा है। ज्योतिषीय व्याख्या के अनुसार, इन ग्रहों के प्रभाव से मानसिक दबाव, चिंता या काम में देरी जैसी स्थितियां महसूस हो सकती हैं। हालांकि, इस बार इसे पूर्ण विषयोग के बजाय अप्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में बताया गया है, क्योंकि शनि वक्री अवस्था में हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कुंडली और अन्य ग्रह स्थितियों के आधार पर फल अलग-अलग माने जाते हैं।

गुरु की स्थिति से मिल सकता है सकारात्मक संकेत

इस दौरान गुरु की मजबूत स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ माना जा रहा है। गुरु को ज्ञान, विवेक, धर्म और मार्गदर्शन का कारक माना जाता है। मान्यता है कि गुरु का शुभ प्रभाव कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।

शरद पूर्णिमा पर करें ये उपाय

  1. शाम को मां लक्ष्मी की पूजा करें, घी का दीपक जलाएं।
  2. भगवान शिव की आराधना करें , अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप करें।
  3. चंद्रमा के दर्शन कर पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें।
  4. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  5. पैसों और रिश्तों से जुड़े फैसले लेते समय धैर्य रखें और जल्दबाजी से बचें।

……..समाप्त…….

Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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