Bateshwar Temple: उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पौराणिक तीर्थ, धर्म संस्कृति की नगरी बटेश्वर में बृहस्पतिवार को ज्येष्ठ एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। सुबह से ही तीर्थ नगरी में हजारों महिलाओं, पुरुषों और अविवाहित युवतियों का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ सुबह 6:30 बजे मुख्य बटेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर तीर्थ की सप्तकोसी नंगे पैर पैदल परिक्रमा शुरू की।
इस दौरान अविवाहित युवतियों ने भी शीघ्र दाम्पत्य बंधन में बंधने और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा के साथ परिक्रमा लगाई। इस महापरिक्रमा में न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इनमें आगरा, इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, मथुरा, दिल्ली, बाह, फतेहाबाद, पिनाहट, जैतपुर और सिरसागंज सहित मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, ग्वालियर तथा राजस्थान के राजाखेड़ा व धौलपुर आदि क्षेत्रों के श्रद्धालु शामिल रहे।
यह ऐतिहासिक परिक्रमा मुख्य बटेश्वर मंदिर प्रांगण से आरंभ हुई, जहां से श्रद्धालु यमुना किनारे स्थित सभी 101 मंदिरों के दर्शन करते हुए एकादशी मंदिर और शौरीपुर परिक्रमा मार्ग से वन खंडेश्वर महादेव के दर्शन करने पहुंचे। इसके बाद मोरहारी गांव से कलीजर, टोका, नारंगी घाट होते हुए मई, खांद, मनमथ और जग्गा के रास्ते पुनः ब्रह्मलाल मंदिर प्रांगण पहुंचकर यह कठिन यात्रा संपन्न हुई।
यात्रा के दौरान पूरा मार्ग धार्मिक भजन-कीर्तनों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’, ‘जय भोले भंडारी तेरी लीला न्यारी’ और ‘बम-बम भोले’ के गगनभेदी उद्घोष किए। ढोलक की थापों और मजीरों की मधुर ध्वनि पर ‘हरि को मत भूले, नईया सहज पार लग जाएगी’ और ‘ओ पापी मन, कर ले भजन, बाद में प्राणी पछताएगा जब पिंजरे से पंक्षी निकल जाएगा’ जैसे मार्मिक भजनों पर महिलाएं और युवतियां जमकर झूमती और नाचती नजर आईं।
बटेश्वर तीर्थ में एकादशी का महत्व और अधिक इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहां यमुना नदी का प्रवाह ‘उत्तरामुखी’ (उत्तर की ओर) है, जिसे शास्त्रों में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन श्रद्धालुओं ने यमुना जी में आस्था की डुबकी लगाई। चूंकि एकादशी व्रत भगवान विष्णु (हरि) के लिए किया जाता है और बटेश्वर स्वयं महादेव (हर) की नगरी है, इसलिए यहां व्रत व परिक्रमा करने से हरि और हर दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है।
मान्यता है कि जेठ की भीषण गर्मी शारीरिक शुद्धि होती है, जिससे दीर्घायु और आरोग्य का वरदान मिलता है। साथ ही, अनजाने में हुए सभी पापों व कष्टों का नाश होता है।













