Home » व्रत एवं त्यौहार » Dhumavati Jayanti 2025: इस धूमवती जयंती पर जानिए मां धूमावती की पूजा विधि और उनकी पौराणिक कथा

Dhumavati Jayanti 2025: इस धूमवती जयंती पर जानिए मां धूमावती की पूजा विधि और उनकी पौराणिक कथा

Facebook
X
WhatsApp

Dhumavati Jayanti 2025: हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन साधकों के लिए महत्व रखता है जो तंत्र साधना या आध्यात्मिक उन्नति की राह पर अग्रसर होते हैं। साल 2025 में भी यह पावन तिथि भक्तों के लिए मां धूमावती की कृपा पाने का उत्तम अवसर है। आइए इस लेख में जानते हैं मां धूमावती का स्वरूप, पूजन विधि और उनके पीछे छिपी पौराणिक कथा के बारे में।

कौन हैं मां धूमावती?

मां धूमावती, देवी पार्वती का एक उग्र और रौद्र रूप हैं। उनका नाम “धूमावती” का अर्थ होता है – “धुएं के समान”। उनका स्वरूप अत्यंत भयावह होता है। उनके बाल बिखरे होते हैं, शरीर पर सफेद वस्त्र होते हैं और एक हाथ में तलवार लिए हुए वे शत्रुनाशिनी मुद्रा में होती हैं।

वे विधवा रूप में पूजी जाती हैं और इसी कारण सुहागिन महिलाओं के लिए उनकी पूजा वर्जित मानी जाती है। मां धूमावती को त्याग, तपस्या, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इनकी आराधना करने से जीवन की कठिनाइयों, रोग, शत्रु और पापों का नाश होता है।

पूजन विधि – कैसे करें मां धूमावती की पूजा?

धूमावती जयंती के दिन पूजा करते समय विशेष विधि और सामग्री का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आइए जानते हैं पूजन की सरल विधि:

  • प्रातः स्नान: सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सूर्य को अर्घ्य: सूरज को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत करें।
  • घर की शुद्धि: पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि वातावरण पवित्र हो सके।
  • पूजन सामग्री: देवी को सफेद वस्त्र, सफेद और आक के फूल चढ़ाएं। अन्य सामग्री में शामिल करें – गंगाजल, कुमकुम, अक्षत, धतूरा, काले तिल, नींबू, सुपारी, दूर्वा, फल, शहद, कपूर, चंदन, नारियल, पंचमेवा आदि।
  • दीप प्रज्ज्वलन: देवी के समक्ष दीपक जलाएं और धूप-दीप से  आरती करें।
  • सफेद तिल का उपयोग: यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है, अतः इसे पूजा में अवश्य शामिल करें।
  • मंत्र पाठ: अंत में “धूमावती अष्टोत्तर शतनाम”, “धूमावती कवच” और “स्तोत्र” का पाठ करें।

धूमावती की पौराणिक कथा

धूमावती देवी की उत्पत्ति से जुड़ी एक अत्यंत रोचक और गूढ़ कथा पौराणिक ग्रंथों में मिलती है।

एक बार माता पार्वती को अचानक अत्यधिक भूख लगी और उन्होंने भगवान शिव से तुरंत भोजन की व्यवस्था करने को कहा। जब तक शिवजी भोजन का इंतजाम करते, तब तक पार्वती की भूख असहनीय हो गई। अपने संयम को खोते हुए उन्होंने भगवान शिव को ही निगल लिया।

शिवजी के शरीर में मौजूद विष के प्रभाव से पार्वती का स्वरूप विकृत हो गया और उनके शरीर से धुआं निकलने लगा। तब सभी देवताओं ने प्रार्थना की कि भगवान शिव को मुक्त किया जाए। जब शिवजी बाहर आए तो वे अत्यंत क्रोधित हुए और पार्वती को श्राप दे डाला कि वे विधवा स्वरूप में जानी जाएंगी और उन्हें धूमावती के नाम से पूजा जाएगा। इस श्राप के बाद ही मां पार्वती ने अपना यह रौद्र और भयानक रूप ग्रहण किया और धूमावती देवी के रूप में पूजी जाने लगीं।

क्यों वर्जित है सुहागिनों के लिए धूमावती पूजा?

धूमावती देवी विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं और इसलिए माना जाता है कि उनका पूजन सुहागिन महिलाओं के लिए शुभ नहीं होता। तंत्र मार्ग में मां धूमावती की साधना करने वाले साधकों के लिए यह दिन विशेष फलदायी होता है, लेकिन आम गृहस्थ जीवन में महिलाएं विशेष सावधानी के साथ इस पूजन से दूर रहती हैं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें