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Hariyali Teej Sindhara 2025: हरियाली तीज पर सिंधारा क्यों दिया जाता है?

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Hariyali Teej Sindhara 2025: हरियाली तीज भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। हरियाली तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है, और इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

इस अवसर पर ‘सिंधारा’ देने की परंपरा भी बहुत खास मानी जाती है। सिंधारा का अर्थ होता है—वो उपहार या सौगात जो विवाहिता महिलाओं को उनके मायके से भेजी जाती है। इसमें नए कपड़े, श्रृंगार का सामान (जैसे चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर), मिठाइयाँ, फल और खासकर घेवर शामिल होते हैं।

सिंधारा क्यों दिया जाता है?

  1. पुत्री के प्रति प्रेम का प्रतीक:
    सिंधारा उस प्रेम और स्नेह का प्रतीक होता है जो एक मां-बाप अपनी बेटी के लिए रखते हैं। हरियाली तीज के दिन मायका अपनी बेटी को सिंधारा भेजकर यह दर्शाता है कि वे उसकी खुशी और समृद्धि की कामना करते हैं।

  2. दांपत्य जीवन को संवारने का प्रतीक:
    सिंधारा में भेजे जाने वाले श्रृंगार और उपहार विवाहिता स्त्री के सौंदर्य और शृंगार को बढ़ाते हैं। यह पारंपरिक रूप से यह विश्वास दिलाता है कि महिला अपने दांपत्य जीवन में खुश और संतुष्ट रहे।

  3. सावन और हरियाली का उत्सव:
    हरियाली तीज सावन की हरियाली से जुड़ा पर्व है। सिंधारा में हरे रंग की साड़ियां, चूड़ियां और मेहंदी भेजना शुभ माना जाता है, जो प्रकृति की ताजगी और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक है।

  4. सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक बंधन:
    सिंधारा देने की परंपरा एक सामाजिक जुड़ाव को भी दर्शाती है, जहां मायका और ससुराल के बीच प्रेमपूर्ण संबंध बनाए रखने की भावना होती है।

इस प्रकार, हरियाली तीज पर सिंधारा केवल एक भेंट नहीं, बल्कि स्नेह, आशीर्वाद और परंपरा का सुंदर संगम होता है, जो भारतीय नारी की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक समृद्ध बनाता है।

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