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Janmashtami 2026 Tulsi Upay: कान्हा को प्रिय है तुलसी, इन उपायों से पाएं श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

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Krishna Janmashtami 2026 Tulsi Upay: कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसीदल (तुलसी के पत्ते) अत्यंत प्रिय हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के बिना कान्हा का कोई भी भोग या पूजा अधूरी मानी जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है। वहीं, इस दिन तुलसी से जुड़ी कुछ भूल करने से बचना भी आवश्यक है।

कान्हा के भोग में तुलसी पत्र अर्पित करें

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को पंजीरी, माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। मान्यता है कि तुलसी के बिना श्रीकृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते।

तुलसी की परिक्रमा और दीपक

जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए तुलसी जी की 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति आती है।

मनोकामना पूर्ति के लिए लाल चुनरी और कलावा

इस शुभ दिन तुलसी जी को नई लाल चुनरी ओढ़ाएं और उनके तने में कलावा बांधकर अपनी मनोकामना भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष रखें।

तुलसी की मंजरी का उपाय

यदि तुलसी के पौधे पर मंजरी आई हुई है, तो जन्माष्टमी के दिन थोड़ी सी मंजरी तोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करें। ऐसा करने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए

यदि पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है, तो जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पौधे के पास बैठकर राधा-कृष्ण का ध्यान करें और तुलसी जी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।

जन्माष्टमी पर तुलसी से जुड़ी भूलें (क्या न करें)

जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें- जन्माष्टमी या किसी भी बड़े पर्व/रविवार/एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। यदि आपको पूजा या भोग के लिए तुलसी चाहिए, तो उसे एक दिन पहले (सप्तमी के दिन) ही तोड़कर रख लें या फिर गमले के आसपास स्वयं गिरे हुए तुलसी के पत्तों का उपयोग करें।

अशुद्ध हाथों से तुलसी न छुएं- बिना स्नान किए या अशुद्ध वस्त्र पहनकर तुलसी के पौधे को स्पर्श न करें।

भोग में बासी या खंडित तुलसी न चढ़ाएं– तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं माने जाते, फिर भी ध्यान रखें कि पत्ता खंडित न हो।

तुलसी के आसपास गंदगी न रखें- जहां तुलसी का पौधा लगा हो, वहां जूते-चप्पल, झाड़ू या कूड़ा न रखें। जन्माष्टमी के दिन तुलसी के आसपास की जगह को अच्छी तरह साफ रखें।

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Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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