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Kartik Purnima 2025 : कार्तिक पूर्णिमा पर भद्रा का साया, कब करें स्नान?

Kartik Purnima 2025
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Kartik Purnima 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि Kartik Purnima पर किया गया एक भी पुण्य कार्य सौ गुना फल देता है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 14 और 15 नवंबर के संधिकाल में पड़ रही है, जिसके चलते लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर किस दिन स्नान और पूजन करना शुभ रहेगा।

जानें तिथि और समय

पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा तिथि 14 नवंबर की रात 6 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 15 नवंबर की शाम 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि का उदयकाल 15 नवंबर की सुबह में रहेगा, इसलिए 15 नवंबर (शनिवार) को कार्तिक पूर्णिमा का स्नान, दान और दीपदान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

भद्रा का रहेगा साया

इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर भद्रा काल का आंशिक प्रभाव भी रहेगा। हालांकि शास्त्रों के अनुसार, यदि भद्रा रात्रि में हो तो उसका प्रभाव शुभ कार्यों पर नहीं पड़ता। इसलिए भक्तजन सुबह के समय गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान कर भगवान विष्णु, शिव और मां तुलसी की पूजा कर सकते हैं।

धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी, इसलिए इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। साथ ही यह दिन देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है, जब गंगा घाटों पर दीपों की रोशनी से पूरा आकाश जगमगा उठता है।
अगर आप कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और दान का शुभ फल पाना चाहते हैं तो 15 नवंबर, शनिवार को प्रातःकाल स्नान और पूजन अवश्य करें। भद्रा काल को लेकर किसी भ्रम में न रहें — सुबह के शुभ मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य फलदायी होंगे।

Shivani Verma
Author: Shivani Verma

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