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Laddu Gopal Shringar : जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार,पूरी होंगी सारी मनोकामना

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Laddu Gopal Shringar : हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जन्माष्टमी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इसी अवसर पर भक्त व्रत भी रखते हैं और कान्हा जी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। जन्माष्टमी पर रात में जागरण किया जाता है और मध्य रात्रि में कान्हाजी की पूजा की जाती है। इसके लिए लड्डू गोपाल की सेवा और श्रृंगार करने का खास महत्व होता है। मान्यता है कि कान्हाजी का सोलह श्रृंगार करने और उन्हें झूला झुलाने से बेहद पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि जन्माष्टमी पर कान्हा जी के श्रृंगार के लिए क्या-क्या जरूरी होती है और उनकी सेवा कैसे करनी चाहिए।

लड्डू गोपाल का श्रृंगार इन चीजों के बिना है अधूरा

गोपी चंदन से करें श्रृंगार

माना जाता है कि जब श्रीकृष्ण द्वारका गए थे तो गोपियां भी उनसे मिलने के लिए वहां पहुंची हुई थी। ऐसे में कृष्णजी ने द्वारका के पास एक सरोवर का निर्माण कराया और वहां की मिट्टी से चंदन भी बनाया जाता है। ऐसे में इस चंदन का नाम गोपी चंदन पड़ा, जो भगवान कृष्ण को बेहद प्रिय है और उनके श्रृंगार में इसे जरूर शामिल करना चाहिए।

लड्डू गोपाल को पहनाएं वस्त्र
कान्हा जी को जन्माष्टमी के दिन पीले, गुलाबी, लाल, हरे आदि रंगों के नए वस्त्र पहनाने चाहिए। ये सभी रंग कान्हा जी को प्रिय हैं और उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाने से लड्डू गोपाल प्रसन्न होते हैं। ऐसे में उनकी विशेष कृपा भी भक्तों को प्राप्त होती है।

बाजूबंद और कमरबंद पहनाएं
लड्डू गोपाल को वस्त्र पहनाने के बाद बाजूबंद और कमरबंद जरूर पहनाना चाहिए। इनके बिना कान्हाजी का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। आप अपने पसंद का मोतियों, नग आदि से निर्मित कमरबंद और बाजूबंद भी पहना सकते हैं।

पायल और माला पहनाएं
श्रृंगार के समय कान्हा जी को पायल और माला भी जरूर पहनानी चाहिए। ऐसा करने से लड्डू गोपाल का सौंदर्य और बढ़ जाता है और भगवान बेहद प्रसन्न होते हैं। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन उन्हें पायल और माला भी जरूर पहनाएं।

हाथों के कड़े और कुंडल पहनाएं
बाल गोपाल को यशोदा मईया कड़े भी पहनाती थीं ताकि उनका सौंदर्य और ज्यादा बढ़ जाए। साथ ही, भगवान कृष्ण को कुंडल भी जरूर पहनाने चाहिए। कानों के कुंडल तेज बढ़ाते हैं और इनके बिना कान्हाजी का श्रृंगार अधूरा रह जाता है।

बांसुरी और पगड़ी है बेहद जरूरी
अगर कान्हाजी के हाथ में बांसुरी न हो तो उनका श्रृंगार अधूरा लगता है। भगवान कृष्ण का बचपन बांसुरी के साथ ही बिता है और उन्हें यह बहुत प्रिय है। वहीं, बचपन में बाल गोपाल पगड़ी पहनते थे। ऐसे में श्रृंगार के समय बाल गोपाल को बांसुरी देना और पगड़ी पहनाना बिल्कुल न भूलें। भगवान कृष्ण को मोर पंख बेहद प्रिय है और इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन उन्हें मुकुट जरूर पहनाएं और मुकुट भी पहनाएं। जब बाल गोपाल द्वारकाधीश बने तो उन्होंने मुकुट धारण किया था।कान्हाजी को नजर से बचाने के लिए यशोदा मईया उन्हें काजल जरूर लगाती थीं। ऐसे में श्रृंगार के समय लड्डू गोपाल को काजल जरूर लगाना चाहिए। वहीं, जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को झूला झुलाने का खास महत्व होता है। ऐसे में पूजा स्थल पर झूला जरूर रखना चाहिए।

माखन की मटकी और गाय रखें
लड्डू गोपाल का श्रृंगार करने के साथ-साथ उनके पास एक छोटी सी गाय लाकर जरूर रखनी चाहिए। वहीं, भगवान कृष्ण को माखन का भोग बेहद प्रिय है। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन छोटी सी मटकी में माखन और मिश्री भरकर कान्हा जी के पास जरूर रखनी चाहिए।

जन्माष्टमी के दिन कान्हा जी की सेवा और पूजा ऐसे करें
अपने घर के मंदिर को साफ करके वहां पीले या लाल रंग का साफ वस्त्र बिछा लें। वहीं, कान्हा जी का स्नान कराने के लिए गंगाजल, दही, शहद, घी, शक्कर आदि से पंचामृत बना लें। बाल गोपाल को पहले गंगाजल से स्नान कराएं फिर पंचामृत से और आखिर में साफ जल से स्नान कराएं। अब किसी मुलायम वस्त्र से कान्हा जी का पानी पोंछ कर उन्हें वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करे।
लड्डू गोपाल के जन्म के दौरान ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ कहना बेहद शुभ माना जाता है। वहीं, श्रृंगार के बाद बाल गोपाल को रोली-अक्षत लगाएं और माखन-मिश्री का भोग लगाएं। ताजे पुष्प, धूप, दीप आदि से पूजा करें और लड्डू गोपाल को झूला भी अवश्य झुलाएं।

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