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Nagchandreshwar Mandir: नाग पंचमी पर ही क्यों खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर? जानें इसकी खास मान्यता

Nagchandreshwar Mandir: नाग पंचमी पर ही क्यों खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर? जानें इसकी खास मान्यता
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Nagchandreshwar Mandir: सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए आज श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान साल में केवल एक बार नाग पंचमी पर खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर परिसर में भक्तों की ज्यादा भीड़ के कारण अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जिससे कई भक्तों के बेहोश और तबीयत खराब होने की खबर सामने आई है। हालांकि, महाकालेश्वर मंदिर समिति ने सोशल मीडिया पर चल रही इस जानकारी को असत्य बताया है। लेकिन, अचानक क्यों नागचंद्रेश्वर मंदिर के आसपास भगदड़ जैसे हालात बन गए? क्यों यह मंदिर साल में 1 ही बार नाग पंचमी पर खुलता है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में-

नागचंद्रेश्वर मंदिर की मान्यता

नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक बार नाग पंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था। हालांकि, यह वरदान मिलने के बाद भी तक्षक संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने महादेव से प्रार्थना की कि वे सदैव उनके सानिध्य में रहना चाहते हैं, इसलिए उन्हें महाकाल वन में निवास करने की अनुमति दी जाए। भगवान शिव ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। इसके साथ ही, भोलेनाथ ने आशीर्वाद दिया कि उनके एकांत और साधना में कोई विघ्न न पड़े। यही कारण है कि तक्षक देव के एकांत को बनाए रखने के लिए इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार, नाग पंचमी के दिन ही खोले जाते हैं।

नागचंद्रश्वर मंदिर में होती है त्रिकाल पूजा श्री नागचंद्रेश्वर का अलौकिक रूप उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजमान है, जिसे नागराज तक्षक का पवित्र निवास स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन मात्र से व्यक्ति को सभी प्रकार के सर्प दोषों से मुक्ति मिल जाती है.नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही यहां त्रिकाल पूजा यानी दिन में तीन अलग-अलग समय पर होने वाली विशेष पूजा का विधान है।

पहली पूजा- रात 12 बजे मंदिर के पट खुलने के तुरंत बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा प्रथम पूजन संपन्न किया जाता है।

दूसरी पूजा (दोपहर)- नाग पंचमी के दिन दोपहर 12 बजे शासकीय प्रशासन की ओर से अधिकारियों द्वारा द्वितीय पूजन किया जाता है।

तीसरी पूजा (संध्या)– शाम 7:30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के उपरांत मंदिर समिति की ओर से महाकाल मंदिर के पुरोहित-पुजारी तृतीय पूजन करते हैं। इसके बाद रात 12 बजे विशेष महाआरती संपन्न की जाती है और आरती के पश्चात मंदिर के कपाट पुनः एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की परंपरा

हर साल नाग पंचमी के अवसर पर मध्य रात्रि 12 बजे जैसे ही नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते हैं, भगवान शिव और नागराज के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा मंदिर के पट खोलने की विधि संपन्न की जाती है। इस पूजा विधान के तहत शैव परंपरा के अनुसार नारियल बांधकर विधिवत पूजन-अर्चन किया जाता है। इसके पश्चात ‘जय श्री महाकाल’ और भगवान नागचंद्रेश्वर के जयघोष के साथ मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए जाते हैं।

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Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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