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Pradosh Vrat 2025: आषाढ़ मास का अंतिम प्रदोष व्रत कब है, 7 या 8 जुलाई? जानिए शुभ मुहूर्त

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Pradosh Vrat 2025: हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पुण्यकारी व्रत माना गया है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार विशेष संयोग के साथ पड़ रही है। ऐसे में यह आषाढ़ का अंतिम और जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत होगा। भक्तों में इसे लेकर तारीख को लेकर थोड़ी उलझन है कि व्रत 7 जुलाई को रखा जाएगा या 8 जुलाई को। आइए जानते हैं सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि।

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प्रदोष व्रत 2025: कब है आषाढ़ मास का अंतिम प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 जुलाई 2025 को रात 11:11 बजे हो रही है, जो कि 8 जुलाई की रात 12:39 बजे तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत का पालन त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में किया जाता है और यह काल 8 जुलाई को आ रहा है, इसलिए यह व्रत 8 जुलाई 2025, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

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प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि आरंभ: 7 जुलाई 2025, रात 11:11 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 8 जुलाई 2025, रात 12:39 बजे

प्रदोष काल: सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 घंटे का समय (स्थानीय समय अनुसार)

व्रत तिथि: 8 जुलाई 2025 (मंगलवार)

इस दिन मूल नक्षत्र और शुक्ल योग का विशेष संयोग बन रहा है। चंद्रमा वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करेंगे और शुक्र ग्रह रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे, जो इस दिन की पुण्यता को और अधिक बढ़ाता है।

प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इससे वैवाहिक जीवन में सुख शांति रहती है। संतान सुख मिलता है। इसके साथ ही दुख परेशानियों से छुटकारा मिलता है। भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद से प्रदोष व्रत रखने वाले के घर आंगन में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं। प्रदोष व्रत के मौके पर रुद्राभिषेक करना अधिक पुण्यदायी माना जाता है।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि
व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।

भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

घर के मंदिर में शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें।

शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं, रोली, चंदन, धूप, दीप अर्पित करें।

पुष्प, भोग अर्पण कर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।

प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और शिव-पार्वती की आरती करें।

अंत में क्षमा प्रार्थना कर पूजन संपन्न करें और प्रसाद बांटें।

 

 

 

 

 

 

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